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बिहार में काली कमाई के कितने कुबेर ?

 

2 करोड़ 75 लाख में कितने ज़ीरो होते हैं, शायद आप गिनते-गिनते थक जाएंगे। लेकिन महज 3 महीने के अंदर बिहार के भ्रष्ट अधिकारियों के पास से 2 करोड़ 75 लाख सिर्फ कैश बरामद हुए हैं....करोड़ों के जेवरात, ज़मीन और फ्लैट के कागजात को छोड़ दें, तो महज 3 महीने के अंदर बिहार के 7 भ्रष्ट अधिकारियों के पास से 2 करोड़ 75 लाख सिर्फ कैश बरामद हुए हैं...उस बिहार में जो बिहार देश का सबसे गरीब राज्य है।

जिस बिहार में गरीबी की दर 33.7 फीसदी है। जिस बिहार के 11 जिलों में 10 में से 6 लोग गरीब हैं। जिस बिहार में औसतन प्रति व्यक्ति आय 50,735 रुपए है। यानी 3 महीने में औसतन 550 लोगों के आमदनी के बराबर सिर्फ कैश मिला है। शिवहर ज़िले में प्रति व्यक्ति आय तो सिर्फ 17569 रुपये हैं। वहीं शिवहर ज़िले के हिसाब से देखें तो करीब 1618 लोगों के आमदनी के बराबर सिर्फ कैश मिले हैं। इसके अलावा करोड़ों के ज्वेलरी, फ्लैट, और ज़मीन की संपत्ति तो अलग है।
निगरानी विभाग के अधिकारियों के हाथ भी नोट गिनते-गिनते थक जा रहे हैं, लेकिन बिहार में काली कमाई के कुबेर और उनके पास से नोटों के बंडल मिलने का सिलसिला नहीं थम रहा है। ज़रा देखते जाइए जून महीने से अब तक कैसे भ्रष्ट अधिकारियों के पास से अकूत संपत्ति मिली है।
तारीख- 14 सितंबर
जगह- पटना
इंजीनियर के पास मिले 15 लाख कैश और लाखों के जेवरात
मंगलवार को पटना के एसकेपुरी में कृष्णा अपार्टमेंट के फ्लैट पर छापेमारी की गई तो पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर के पास से 15 लाख कैश और लाखों के ज़ेवरात मिले हैं। इसके अलावा कई अकाउंट और संपत्तियों के कागजात भी बरामद किए गए हैं, साथ ही कई जगहों पर निवेश के कागजात भी मिले हैं। लेकिन हाल के दिनों में बेनकाब हुए काली कमाई के इन कुबेरों की फेहरिस्त में ये पहला नाम नहीं है।

तारीख- 28 अगस्त
जगह- फकुली चेक प्वाइंट, मुजफ्फरपुर-वैशाली सीमा
चेकिंग में इंजीनियर की गाड़ी से 18 लाख कैश बरामद
इंजीनियर के ठिकानों से मिले कुल 70 लाख कैश और दस्तावेज़

हाल ही में 28 अगस्त को मुजफ्फरपुर-वैशाली सीमा पर फकुली चेकिंग प्वाइंट पर दरभंगा के ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार की गाड़ी से 18 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे. इतने रुपये मिलने के बाद अगले दिन रविवार को इंजीनियर अनिल कुमार के दरभंगा और पटना स्थित दो फ्लैट पर छामपेमारी कर 49 लाख रुपये और बरामद किए गए हैं. इसके अलावा प्रॉपर्टी के कुछ कागजात भी मिले हैं। लेकिन रसूख देखिए कि पकड़े जाने के बाद इंजीनियर ना सिर्फ कबूल करता है बल्कि धमकी भी देता है
''वर्तमान में जो माहौल है, उसमें मजबूरन रुपये लेने पड़ते हैं. प्रखंड स्तर पर तैनात इंजीनियर से लेकर पटना तक कौन है जो रुपया नहीं ले रहा. और जो रुपया नहीं ले रहा, क्या वह चैन से नौकरी कर पा रहा है. मुंह अगर खोल दिया तो पटना तक विस्फोट हो जाएगा."
-----अनिल कुमार, आरोपी इंजीनियर
रसूख का अंदाजा और करप्शन के कॉकस का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इंजीनियर अनिल कुमार की इस धमकी के बाद उसे थाने से ही जमानत भी मिल जाती है।

तारीख- 13 अगस्त 2021
इंजीनियर के घर से मिला 1 करोड़ 43 लाख कैश
67 लाख की ज्वेलरी और जमीनों के कागजात

इससे पहले 13 अगस्त को भी पटना में पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर रविंद्र कुमार के ठिकानों पर जब छापा मारा गया था, तो अधिकारियों के होश उड़ गए थे। इतने नोट मिले कि गिनने के लिए मशीन मंगानी पड़ी। आरोपी इंजीनियर ने अपने बेड रूम की छतों पर लॉकर और बॉक्स बनवा रखे थे। जिसमें सूटकेसों में नोटों का बंडल भर कर रखा गया था। पांच-पांच लाख का बंडल रस्सियों से बांध कर रखा गया था। सिर्फ 1 करोड़ 43 लाख कैश बरामद किए गए। इसके अलावा 67 लाख के अधिक के ज्वेलरी, 53 लाख रुपए के SBI की दर्जनों बैंक पासबुक, बीमा से संबंधित कागजात के अलावा 6 से 8 जगहों पर जमीन में निवेश के कागजात मिले थे।
तारीख- 24 जून 2021
DTO के आवास पर छापेमारी
मिले 50 लाख से अधिक कैश

वहीं 24 जून को निगरानी विभाग के छापे में मुजफ्फरपुर के डीटीओ रजनीश लाल के घर से पचास लाख रुपए नकद और जेवरात के साथ कई अहम दस्तावेज बरामद किए थे। इसके अलावा भ्रष्ट अधिकारियों की फेहरिस्त में और भी हैं। देखते जाइए।

तारीख- 1 सितंबर
जगह- पटना
नगर परिषद अधिकारी के पास मिली 1 करोड़ की संपत्ति

तारीख- 4 सितंबर
जगह- पटना
बालू माफिया से सांठगांठ के आरोप में निलंबित DSP के ठिकानों से मिली काली कमाई
तारीख- 8 सितंबर
जगह- दानापुर, आरा, बक्सर
बालू माफिया से सांठगांठ के आरोप में निलंबित MVI के ठिकानों से मिली अकूत संपत्ति

जून महीने से अब तक काली कमाई के 7 कुबेरों के पास से अब तक 2 करोड़ 75 लाख कैश मिले हैं, इसके अलावा करोड़ों के करोड़ों के जेवरात, ज़मीन और फ्लैट के कागजात मिले हैं। साफ हैं ये काली कमाई लोगों से ली गई रिश्वत और कमीशन से बनाई गई है। यानी बिहार में बिना घूस दिए कोई काम नहीं बनता है। जिसकी तस्दीक इंडिया करप्शन सर्वे की रिपोर्ट भी करती है।
इंडियन करप्शन सर्वे-2019 की रिपोर्ट में बिहार का स्थान दूसरा था. यहां 75 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया था कि उन्हें अपना काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी थी. इनमें भी 50 फीसद लोगों ने तो यहां तक कहा कि उन्हें काम करवाने के एवज में अधिकारियों को कई बार रिश्वत देनी पड़ी. ऐसा भी नहीं है कि सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. सरकार ने आइएएस व आइपीएस अधिकारियों तक के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के लिए स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) का गठन किया हुआ है.। इसी यूनिट ने 2007 में पहला मामला राज्य के पुलिस महानिदेशक रहे नारायण मिश्रा के खिलाफ दर्ज किया था. 2012 में इनके पटना स्थित आलीशान मकान को जब्त कर दिव्यांग बच्चों के स्कूल में तब्दील कर दिया गया था. 2011 में नीतीश सरकार ने आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) का गठन किया. यह इकाई आय से अधिक संपत्ति के मामलों के अलावा नॉन-बैंकिंग कंपनियों के मामले, नारकोटिक्स, साइबर क्राइम तथा शराब माफिया के खिलाफ दर्ज केस को देखती है. हाल में ही यह आदेश जारी किया गया है कि जो अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज की जाएगी. भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई एवं निगरानी अन्वेषण ब्यूरो तक आम लोगों की पहुंच आसान बनाने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है. कोई भी व्यक्ति उस नंबर शिकायत दर्ज करा सकता है और उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी. हालांकि सच ये भी है कि केस दर्ज करने की रफ्तार में कमी देखी जा रही है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में मामले दर्ज करने में कमी आई है. आंकड़ों के अनुसार 2017 में 83, साल 2018 में 45 व साल 2019 में 36 शिकायतें विजिलेंस में दर्ज की गईं. 2020 में कोरोना काल में शिकायतों में काफी कमी आई. इसके पीछे वजह दरअसल बताई जाती है कि निगरानी हो या एसवीयू या आर्थिक अपराध ईकाई, एजेंसियों में मैनपावर की कमी है और शायद यही वजह है कि बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों को कार्रवाई का डर नहीं है। 

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