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मधुबनी के झंझारपुर में खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है कमला, लोगों में है दहशत

 


झंझारपुर में खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है कमला, लोगों में है दहशत : झंझारपुर में कमला नदी का जलस्तर मंगलवार को भी लाल निशान से ऊपर रहा। कमला खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही थी। फिलहाल जलस्तर में गिरावट शुरू होने से स्थानीय लोगों को राहत मिली है। जलस्तर में वृद्धि होते ही स्थानीय प्रशासन और जलसंसाधन विभाग के अधिकारी लगातार जायजा लेते रहते हैं।

कमला नदी तटबंध के भीतर बसे लोग फिलहाल अपने अपने गृहस्थल पर ही है। कमला नदी के जलस्तर यदि 52.50 से ऊपर आता है तो नवटोलिया का एक टोला जहां 25 परिवारों कह बस्ती है, वाे एनएच-57 पर आश्रय स्थल बना लेते। फिलहाल सभी अपने-अपने घर पर ही है। हालांकि कमला नदी के जलस्तर में वृद्धि होते ही पूर्वी और पश्चिमी तटबंध के किनारे बसे गांव के लोग पूरा सतर्क रहते हैं कि कब क्या हो जाएगा।


नरूआर,गोपलखा और रखबारी का तटबंध जुलाई के महीने में 2019 में टूटा था जिससे कई गांवों जलप्लावित हो गए थे। एक महीने के बाद कमला नदी के जलस्तर के जलस्तर में वृद्धि होने से लोग ऊंचे स्थानों को चिह्नित कर रहे थे। जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण प्रशासन से लेकर आम लोगों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। बताया जाता है कि जुलाई और अगस्त माह में बाढ़ अाने का ख़तरा का सबसे ज्यादा रहता है।

जयनगर में भी खतरे के निशान से ऊपर है कमला
नदी में गाद होने की वजह से नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में थोड़ी भी बारिश होने पर कमला का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास आ जाता है। नेपाल के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में विगत दो-तीन दिनों से सामान्य बारिश हो रही है। बावजूद जयनगर में कमला खतरे की निशान से ऊपर बह रही है। मंगलवार को सुबह 8 बजे कमला का जलस्तर खतरे की निशान से 25 सेमी अधिक आंका गया। पूरे दिन जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी रहा। नदी के पूर्वी एवं पश्चमी क्षेत्र में बालू दिख रहा है। बाढ़ नियंत्रक प्रमंडल जयनगर के एसडीओ सतेंद्र प्रसाद राय ने बताया कि इंजीनियरों की एक कमेटी कमला के गाद काे हटाने को लेकर विचार-विमर्श करेगी।

नेपाल के हिमालय क्षेत्र से बिहार आती है कमला
जयनगर कमला पुल से होकर बिहार में प्रवेश करती है। कमला नेपाल के हिमालय क्षेत्र से बहकर आती है और बिहार में बहती है। कमला में बार-बार बाढ़ आने के पीछे का कारण कमला के तल में बैठा गाद भी है। गाद के प्रबंधन से कमला में बाढ़ की कहर थम सकता है और प्रति वर्ष होने वाले जानमाल की क्षति रुक सकती है। हिमालय से निकलने वाली नदियां अपने साथ गाद भी बहाकर लाती हैं। गाद का प्रबंधन करके संवेदनशील हिस्सों में बाढ़ का खतरा कम किया जा सकता है। हर साल नेपाल में माॅनसून के समय जल अधिग्रहण क्षेत्र में बारिश होने से जयनगर होते हुए बिहार में प्रवेश करने वाली कमला में बाढ़ आती है। माॅनसून के अलावा भी कमला में कभी कभी बाढ़ आती रहती है। गाद भर जाने से तल उथल हो जाने की वजह से बाढ़ की स्थिति बनी रहती है। बता दें कि नदियां अपने साथ गाद, पत्थर के टुकड़े और खनिज बहाकर लाती हैं। ये पहाड़ों और नदियों के किनारों के क्षरण से उत्पन्न होते हैं। 

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