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पटना : खाद की कीमत से एक रुपया भी अधिक लिया तो FIR

 



राज्य के कृषि समन्वयक भी खाद की कीमतों पर नजर रखेंगे। उन्हें अपनी पंचायत के किसानों से बातकर यह जानकारी लेनी होगी कि कोई डीलर खाद की अधिक कीमत तो नहीं ले रहा है। अगर कहीं गड़बड़ी मिली तो खाद कंपनियों को भी इसके लिए जिम्मेवार माना जाएगा।


कृषि निदेशक आदेश तितरमारे ने खाद संबंधी किसी भी शिकायत को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस नीति बनाई है। नीति में कृषि अधिकारियों के साथ खाद कंपनियों की भी जिम्मेवारी तय की गई है। अधिकारी तो निगरानी रखेंगे और एक रुपये अधिक लेने की शिकायत पर 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज करेंगे ही, कंपनियों को भी कई तरह की जिम्मेवारी दी गई है।

निदेशक द्वारा निर्गत पत्र में रेलवे रैक प्वाइंट के भाड़ा के नाम पर कोई किसानों से अधिक कीमत ले तो इसके लिए कंपनी के अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी। इसके लिए सभी कंपनियों के राज्य प्रबंधक को निर्देश दिया गया है कि वह अपने एक अधिकारी के खाद की कीमत पर नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी बनाएं। विभाग ने अपनी नीति में डीलर द्वारा खरीददार को रसीद नहीं देना, स्टॉक की सही जानकारी और कीमत प्रदर्शित नहीं करना, बिना लाइसेंस खाद की बिक्री करना या फिर यूरिया के साथ दूसरी खाद को टैग कर बेचना आदि अनियमितताओं के लिए कंपनियों को जिम्मेदार माना है। ऐसी स्थिति आने पर 24 घंटे में एफआईआर दर्ज होगी।

कृषि विभाग ने की गई सभी व्यवस्था पर नजर रखने की जिम्मेवारी संयुक्त निदेशक शष्य को दिया है। कृषि समन्वयकों के साथ जिला कृषि पदाधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है कि वह किसान समूहों की बैठक कर खाद की बिक्री की वास्तविक कीमत का पता लगाएं।

खरीफ की खेती शुरू होने के साथ ही किसानों के बीच यूरिया की मांग बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा आवंटित खाद को प्राप्त कर उसे सही ढंग से निर्धारित मूल्य पर बेचने के लिए बनी नीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके पहले कृषि सचिव डॉ. एन सरवण कुमार ने भी सभी जिलाधिकारियों को खाद के स्टॉक वेरिफिकेशन का आदेश पहले ही दे दिया है। उन्होंने निर्देश दिया था कि पॉश मशीन और स्टॉक में अंतर हो तो तुरंत कराई होनी चाहिए। इस प्रकार कृषि विभाग ने इस बार खाद के कालाबजारियों पर अंकुश लगाने के लिए हर स्तर से कार्रवाई शुरू कर दिया है।

खरीफ में खाद की जरूरत

10 लाख टन यूरिया की होगी जरूरत

3.5 लाख टन डीएपी की जरूरत

02 लाख टन एनपीके की जरूरत 

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