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बिहार के भागलपुर में गंगा किनारे 1500 हेक्टेयर में होगी जैविक खेती

 


नमामि गंगे स्वच्छता अभियान के तहत इस साल से गंगा नदी के किनारे 15 सौ हेक्टेयर में जैविक खेती होगी। पांच-पांच हेक्टेयर के लिए तीन कलस्टर का गठन किया गया है। साथ ही 25 किसानों का एक समूह बनाया गया है। जैविक खेती करने वाले किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सुल्तानगंज व नाथनगर प्रखंड के किसानों का चयन गंगा किनारे जैविक खेती करने के लिए किया गया है। जैविक खेती करने से संबंधित सामान आदि की खरीद के लिए विभाग द्वारा किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा।


25 किसानों का बना समूह

गंगा नदी किनारे जैविक खेती के लिए 25-25 किसानों का समूह बनाया गया है। किसानों को जैविक खेती से संबंधित सामानों की खरीद के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को राशि उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि अग्रिम दी जाएगी। कृषि विभाग ऐसे किसानों को बाजार उपलब्ध कराने की भी तैयारी कर रहा है।

रसायन का नहीं होगा उपयोग

गंगा किनारे 15 सौ हेक्टेयर में जैविक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसान करेला, परवल, भिंडी, कद्दू, परोल, बैगन व मक्का आदि की खेती कर सकेंगे। सुल्तानगंज व नाथनगर के इलाके में इसकी खूब खेती होती है। किसानों को जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट बनाने के साथ-साथ जैविक खेती से होने वाले फायदे के बारे में बताया जा रहा है। जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी को पोषक तत्व भी खूब मिलेंगे।

इन गांवों में होगी खेती

सुल्तानगंज प्रखंड के गनगनिया, अब्जूगंज, मस्दी, तिलकपुर, अकबरनगर, खेरैहिया और नाथनगर प्रखंड के रन्नुचक व रत्तिपुर बैरिया में जैविक खेती होगी। गनगनिया से रत्तिपुर बैरिया के बीच गंगा किनारे 15 सौ हेक्टेयर जमीन पर खेती होगी।

जमीन होगी उपजाऊ, दूषित नहीं होगा गंगा जल

गंगा किनारे के गांवों में जैविक खेती होने से गंगा जल दूषित नहीं होगा। जैविक खेती में किसी भी तरह के रसायन व रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं होगा। पौधे को केंचुआ खाद, जीवाणु खाद, गोबर से पोषक तत्व मिलेगा। नीम व गोमूत्र आधारित कीटनाशकों का प्रयोग पौधों पर किया जाएगा। इससे गंगा का पानी भी रसायन से होने वाले प्रदूषण से बचा रहेगा।

जैविक खेती के फायदे

-भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी और पैदावार में वृद्धि होगी

-खेती की लागत में कमी आएगी, भू-जलस्तर में वृद्धि होगी

-जैविक उत्पादकों की मांग अधिक होने से किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होगी

-जैविक खाद का प्रयोग होने से गंगा नदी में रासायनिक पदार्थ नहीं जाएंगे

-जमीन के अंदर का पानी प्रदूषित नहीं होगा, गंगा का पानी अमृत बना रहेगा

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