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कोरोना काल में 800 यूनिट रक्तदान कर संकटमोचक बना कांगड़ा सेवियर्स

 रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसी सोच के साथ 26 जून 2016 को पांच दोस्तों ने संस्था की स्थापना की, जिसका नाम रखा कांगड़ा सेवियर्स। आज इसके 700 सदस्य बन चुके हैं।  कांगड़ा सेवियर्स के सदस्य कोरोना के दौरान संकटमोचक बनकर सामने आए। 14 मार्च 2020 से अब तक कांगड़ा सेवियर्स के सदस्यों ने कांगड़ा के अस्पतालों में 815 यूनिट रक्तदान किया है। इसके अलावा कांगड़ा सेवियर्स के सदस्य अपने शहर के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर आसपास के लोगों के रक्तदान के लिए प्रेरित भी करते है। 


कांगड़ा जिला में इस समय कांगड़ा सेवियर्स, धर्मशाला सेवियर्स, पालमपुर सेवियर्स, नगरोटा सेवियर्स, देहरा सेवियर्स, नगरोटा सूरियां सेवियर्स के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप काम चल रहे है। किसी को रक्त की जरूरत के संदेश के बाद डोनर सीधे उस अस्पताल में जाकर रक्तदान करता है। कांगड़ा सेवियर्स की टीम के माध्यम से अन्य जिलों चंबा, हमीरपुर, सोलन व शिमला में भी ग्रुप बनाए गए हैं। 

कांगड़ा सेवियर्स के संस्थापक सदस्य व उपाध्यक्ष तरुण धीमान का कहना है कि अध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी की सोच से चलते पिछले पांच सालों से सेवियर्स ग्रुप काम कर रहा है। प्रदेश के कई अधिकारी इस ग्रुप के सदस्य बने हैं, जो मार्गदर्शन देने के साथ रक्तदान भी कर रहे हैं। कोरोना काल में सेवियर्स ने कांगड़ा में 800 से अधिक यूनिट रक्तदान करवाया है। इसके अलावा पिछले पांच सालों में प्रदेश में इस ग्रुप के सदस्यों ने 4500 से अधिक यूनिट रक्तदान करवाया है। 

26 जून 2016 को हुई थी स्थापना

कांगड़ा सेवियर्स के संस्थापक वीरेंद्र चौधरी ने 26 जून 2016 को अपने पांच दोस्तों के साथ मिलकर इसकी स्थापना की थी। इसके बाद से यह ग्रुप काम कर रहा है। अब तक इसके कांगड़ा जिला में 700 के करीब सदस्य बन चुके हैं, जो स्थायी डोनर भी हैं। इसके अलावा कांगड़ा में कांगड़ा सेवियर्स की महिला रक्तदान विंग का व्हाट्सएप ग्रुप भी काम कर रहा है। नगरोटा सूरियां की रहने वाली कुनिका इस ग्रुप का एडमिन हैं। इस ग्रुप में 100 के करीब युवतियां रक्तदान करने के साथ लोगों को इसके प्रति प्रेरित करती हैं। वहीं 26 सदस्य स्थायी डोनर है।

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