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Chanakya Niti : जन्म देने वाली माता के अलावा ये चार स्त्रियां भी होती हैं मां समान

 

संसार में जन्म देने वाली मां को बहुत ऊंचा दर्जा दिया गया है क्योंकि एक मां अपने बच्चे की खुशी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार रहती है. एक बच्चा बचपन में सबसे ज्यादा समय अपनी मां के साथ ही बिताता है और वो मां ही उस वक्त बच्चे की पहली गुरू बनकर उसमें संस्कार रूपी बीज डालती है.

आचार्य चाणक्य ने भी मां को बहुत सम्माननीय बताया है. लेकिन उन्होंने जन्म देने वाली मां के अलावा चार अन्य स्त्रियों का जिक्र किया है, जिन्हें मां के समान ही सम्मान देना चाहिए. आचार्य चाणक्य के मुताबिक संसार में पांच तरह की स्त्रियां मां होती हैं, यहां जानिए इस बारे में क्या कहती है चाणक्य नीति.

राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्र पत्नी तथैव च
पत्नी माता स्वमाता च पञ्चैता मातरः स्मृता

1. प्रजा के पालन की जिम्मेदारी उस राज्य के राजा या शासक पर होती है.

ऐसे में उस प्रजा के लिए राजा पिता के समान हुआ और उसकी पत्नी मां के समान होती है. हर व्यक्ति को राजा या शासक की पत्नी को मां समान ही सम्मान देना चाहिए.

2. गुरू भी हर शिष्य को सही मार्ग दिखाता है. उसमें अच्छे संस्कार डालता है. इसलिए उसकी तुलना पिता से की जाती है. हर व्यक्ति को गुरू की पत्नी को अपनी माता के समान सम्मान देना चाहिए.

3. मित्र की पत्नी को भाभी कहा जाता है. भाभी को मां का दर्जा दिया गया है. इसलिए अपने मित्र की पत्नी को भी हर शख्स को मां जैसा मानना चाहिए. इससे उस व्यक्ति का सम्मान बढ़ता है.

4. पत्नी की मां का दर्जा भी आपकी खुद की जन्म देने वाली माता से कम नहीं होता. इसलिए उन्हें हमेशा अपनी माता के समान समझना चाहिए और पूरा मान-सम्मान देना चाहिए.

5. चाणक्य जन्म देने वाली माता को पांचवी मां कहते हैं. वो मां जिसकी वजह से आपका अस्तित्व है. वो जो आपको आपके लक्ष्य तक ले जाने का मार्ग दिखाती है. ऐसी मां पूज्यनीय है. उनका हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए. 

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