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समर सीजन से नौ मिनट में होगा धर्मशाला से मैक्‍लोडगंज का रोमांचक सफर



Dharamshala to Mcleodganj Ropeway धर्मशाला बस अड्डे से लेकर मैक्लोडगंज का सफर रोपवे में मात्र 9 मिनट में पूरा कर सकेंगे। इस सफर में जहां मैक्लोडगंज धौलाधार और गगल हवाई अड्डे का दृश्य दिखेगा वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम सहित मां बज्रेश्वरी व पौंग झील का नजारा भी ले सकेंगे।

धर्मशाला, नीरज व्यास। अगर आप गर्मियों में पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज व धर्मशाला में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए खुशी की खबर है। धर्मशाला में समर टूरिस्‍ट सीजन कुछ खास रहने वाला है। पर्यटक मनमोहक वादियों का लुत्फ उठाने के साथ-साथ रोपवे का आनंद ले सकेंगे। धर्मशाला बस अड्डे से लेकर मैक्लोडगंज का सफर रोपवे में मात्र 9 मिनट में पूरा कर सकेंगे। इस सफर में जहां मैक्लोडगंज, धौलाधार और गगल हवाई अड्डे का दृश्य दिखेगा वहीं, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम सहित मां बज्रेश्वरी व पौंग झील का नजारा भी रोपवे के केबिन में बैठे-बैठे ले सकेंगे।

धर्मशाला-मैक्लोडगंज रोपवे का निर्माण कार्य मई 2021 में पूरा हो रहा है। इसलिए इस बार के पर्यटन सीजन में यहां व्यवसाय को पंख लगने वाले हैं। कोविड-19 के कारण यह कार्य कुछ प्रभावित जरूर हुआ था, लेकिन अब निर्माण कार्य में जुटी कंपनी को पर्यटन विभाग ने 31 मई 2021 की अंतिम तिथि कार्य पूरा करने के लिए दे दी है। ऐसे में पर्यटन सीजन मुख्य रूप से 15 अप्रैल से शुरू माना जाता है और यह लगभग अक्टूबर तक रहता है। बीच में दो माह बरसात भी रहती है। लेकिन धर्मशाला में पर्यटन के लिए डलझील, भागसूनाग मंदिर, बौद्ध मंदिर, वाटर फाल, नड्डी सन सेट व्यू, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, कुनाल पथरी मंदिर, टी गार्डन, अघंजर महादेव व इंद्रू नाग मंदिर खनियारा, तपोवन, विधानसभा परिसर व पैराग्लाइडिंग के साथ-साथ अब रोववे भी पर्यटकों को आकर्षित करेगा।
144.9 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा है तैयार

144.9 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 1.75 किलोमीटर हवाई दूरी वाले रोपवे का निर्माण कार्य 31 मई को पूरा होगा। रोपवे में 18 से 24 केबिन होंगे और प्रति घंटे एक हजार व्यक्तियों को लाने और ले जाने की क्षमता होगी। इसके साथ ही 1.75 किलोमीटर की दूरी को नौ मिनट में तय किया जा सकेगा। धर्मशाला बस अड्डे के पास से शुरू होकर यह रोपवे मैक्लोडगंज बौद्ध मंदिर तक बन रहा है। इसका दूसरा छोर बौद्ध मंदिर के पास बन रहा है। 13 टावरों के साथ, यह एक मोनो-केबल डिटैचेबल गोंडोला (केबिन) सिस्टम युक्त रोपवे होगा। धर्मशाला से मैकलोडगंज की दूरी करीब आठ से दस किलोमीटर है। लेकिन रोपवे बनने से सफर नौ मिनट में पूरा होगा। वहीं पर्यटकों को जाम से भी छुटकारा मिलेगा।

कोरोना महामारी ने बढ़ा दी एक साल समय अवधि

धर्मशाला रोपवे की इस परियोजना को कायदे से 30 जून 2020 को पूरा हो जाना था, लेकिन दुर्भाग्य से कोरोना महामारी के कारण इस परियोजना को पूरा करने के एक साल अतिरिक्त समय लग रहा है। 13 फरवरी 2015 को सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी और इसकी प्रक्रिया शुरू हुई। जनवरी 2016 में इस रोपवे का नींव पत्थर रखा गया। एक जून 2017 को वन विभाग से स्वीकृति मिली और 2019 में अंतिम स्वीकृति मिली। यह परियोजना 31 मई 2021 को पूरी हो रही है।

रोपवे करेगा पर्यटकों का स्‍वागत

उपनिदेशक पर्यटन विभाग धर्मशाला सुनयना का कहना है इस पर्यटन सीजन में पर्यटकों का स्वागत रोववे भी करेगा। पर्यटक इस सीजन में रोपवे का लुत्फ उठा सकेंगे। 31 मई 2021 को यह परियोजना पूरी हो रही है। इसके लिए परियोजनाओं में जुटी कंपनी को कार्य पूरा करने की अंतिम तिथि दी गई है। जून माह से पर्यटक इस रोमांचक सफर का रोपवे में आनंद ले सकेंगे।

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