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खुद को बताते हैं ग्रैजुएट, सड़क बनी है आशियाना - Una News



हिन्दी और अंग्रेजी में फर्राटेदार बात करने वाले 68 वर्षीय गोबिंद लाल का आश्रय स्थल सड़क के किनारे खुला आसमान बना हुआ है। उपमंडल अम्ब के मुख्य चौराहे मुबारिकपुर में बंद पड़ी दुकानों के शटर के आगे ही इस बुजुर्ग का आश्रय स्थल है। सैंकड़ों वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क के एक छोर पर गोबिंद लाल अपनी दुनिया समेटे हुए है। एक बिस्तर और सभी देवी-देवताओं के इश्तहार वहां लगाए हुए हैं। गाडिय़ों के शोर के बीच गोबिंद लाल निशिं्चत यहीं बिस्तर लगाकर सोते हैं और यहीं पर वह आने-जाने वालों को निहारते हैं। खुद को ग्रैजुएट बताने वाले यह गोबिंद लाल करीब 3 वर्ष पहले मुबारिकपुर चौक आए और यहीं के होकर रह गए। सुबह-सवेरे गत्ते और कबाड़ को एकत्रित कर उसे बेचकर जो राशि एकत्रित होती है उसी से अपना गुजारा चलाते हैं।


कुछ ऐसे सज्जन भी हैं जो इसे दान स्वरूप कुछ राशि प्रदान करते हैं। इस प्रकार गोङ्क्षबद लाल की रोजी-रोटी चलती है। गोबिंद लाल किसी भी दुकान से कोई सामान ले तो उसका भुगतान जरूर करता है। यदि उस दिन नहीं तो अगले दिन। ऐसा बताया जाता है कि 3 वर्ष पहले मानसिक तौर पर अस्वस्थ गोबिंद लाल मैड़ी में रह गए थे। इस प्रकार वह मुबारिकपुर पहुंच गए। अपने पिता का नाम राम चंद बताते हैं और कहते हैं कि उन्होंने बाकायदा बी.ए. पास किया है। हर रोज अंग्रेजी और हिंदी का अखबार लेते हैं और उसे ध्यान लगाकर पूरा पढ़ते हैं। चाहे सर्दी, गर्मी या बरसात हो सड़क पर ही इनका आशियाना बना हुआ है। जब भी कोई वाहन निकलता है तो बर्बस ही हर किसी का ध्यान उनकी तरफ चला जाता है।

मुबारिकपुर में हर कोई उनसे परिचित है। जब भी कोई जरूरत पड़ती है तो दुकानदार उसे सामान दे देते हैं लेकिन उसके बदले वह (गोङ्क्षबद राम) उसकी कीमत जरूर देते हैं। अब यहां क्यों पहुंचे और आखिर जालंधर जहां वह अपना घर बताते हैं वहां क्यों नहीं जाना चाहते यह नहीं बताते। इतना है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ तो हैं लेकिन इनकी दुनिया अपने हिसाब से चलती है। केवल सड़क ही इनका पूरा संसार बनी हुई है।

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