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कर्मचारियों को मंजूर नहीं बिजली का निजीकरण, हिमाचल में जगह-जगह प्रदर्शन



बिजली के निजीकरण को लेकर बिजली बोर्ड कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को बिजली कर्मचारी व अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति के आह्वान पर प्रदेश भर में विंग, वृत्त एवं मंडल स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर बिजली कंपनियों के निजीकरण का विरोध किया। 

बोर्ड मुख्यालय, कुमार हाऊस के बाहर सैंकड़ों कर्मचारियों व अभियंताओं ने भी बिजली कानून-2021 का धरना-प्रदर्शन के माध्यम से जोरदार विरोध किया। इस अवसर पर बिजली बोर्ड पावर इंजीनियर एसोसिएशन के महासचिव ई. तुषार गुप्ता, डिप्लोमा इंजीनियर के पदाधिकारी व बोर्ड के पैंशनर्ज भी उपस्थित थे।

बिजली कंपनियों को निजी हाथों में देने पर अड़ी केंद्र सरकार

इस अवसर पर यूनियन के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिजली कानून-2003 के अधीन बिजली बोर्डों को विघटन के बाद बिजली कंपनियों की खराब स्थिति से सबक न लेते हुए इसके विपरीत बिजली कंपनियों को निजी हाथों में देने के लिए अडिग़ है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में बिजली बोर्डों का निजीकरण हुआ वहां एक ओर निजी कंपनियां बिजली क्षेत्र की सेवाएं देने में बुरी तरह विफल रहीं, वहीं विद्युत दरों में कई गुना वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार द्वारा संसद के चालू बजट सत्र में अब इलैक्ट्रीसिटी एमैंडमैंट बिल-2021 ड्राफ्ट लाया गया है, जिससे कर्मचारियों व अभियंताओं में भारी रोष है। इस कानून में विद्युत वितरण के लिए मौजूदा लाइसैंसिंग प्रणाली को समाप्त करने का प्रावधान रखा गया है।
बिल के संशोधन के बाद प्रदेश सरकार का खत्म हो जाएगा अधिकार

बिजली संशोधन कानून-2021 के पारित हो जाने से बिजली क्षेत्र संबंधित निर्णय लेने के जहां राज्य सरकार के अधिकार खत्म हो जाएंगे, वहीं बिजली नियामक आयोग में केंद्र सरकार का वर्चस्व बढ़ जाएगा। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दूर-दराज क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की लागत औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में काफ ी ज्यादा है जिसे अभी विद्युत दरों में क्रॉस सबसिडी से कम किया जा रहा है लेकिन कानून पारित हो जाने से दूरदराज क्षेत्र में बिजली दरें आपूर्ति के हिसाब से तय होंगी और इनमें कई गुना बढ़ौतरी होगी।
बिजली निजीकरण से 26 हजार पैंशनर्ज की पैंशन पर खड़ा होगा सवाल
निजीकरण के बाद जहां बड़े उपभोक्ताओं को उनकी सुविधा अनुसार बिजली मिलेगी, वहीं छोटे उपभोक्ताओं को महंगी बिजली मिलेगी और विद्युत आपूर्ति में दी जा रही सेवाएं भी बुरी तरह से प्रभावित होंगी। राज्य बिजली कंपनी के निजीकरण के बाद इसके लगभग 26,000 पंैशनर्ज की पैंशन की अदायगी पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जाएगा।

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