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शिमला में मीट-अंडों की डिमांड में आई भारी कमी, कारोबारी परेशान




बर्ड फ्लू की दहशत के चलते राजधानी में मीट और अंडों की मांग में भारी गिरावट आई है। पिछले कुछ दिनों से शहर में चिकन की मांग 60 फीसदी तक घट गई है। वहीं, अंडों की बिक्री भी 20 से 30 फीसदी तक घटी है।


नगर निगम के लालपानी स्थित स्लॉटर हाउस में अब रोजाना करीब एक हजार मुर्गे कट रहे हैं। पहले इनकी संख्या दो हजार से 2500 के बीच रहती थी। विंटर टूरिस्ट सीजन के बावजूद डिमांड में गिरावट होने से मीट कारोबारी भी परेशान हैं। इन्होंने नगर निगम से मीट सप्लाई की मांग कम कर दी है।

विंटर सीजन के दौरान राजधानी के होटल पैक रहते हैं। ऐसे में यहां बाकी सामान के साथ मीट की डिमांड में भी इजाफा हो जाता है। लेकिन पहले कोरोना और अब बर्ड फ्लू की दहशत के चलते कारोबार 60 फीसदी तक गिर गया है। वहीं सर्दियों में उबले हुए या कच्चे अंडे की मांग भी घट गई है। उधर नगर निगम का कहना है कि पंजाब, हरियाणा की जिन एजेंसियों से सप्लाई ली जाती है, उनसे अब प्रमाणपत्र भी लिया जा रहा है। ऐसा एहतियात के तौर पर किया जा रहा है। 

एजेंसियों के अलावा कारोबारियों से भी पूछा जा रहा है कि कहीं मुर्गियों की अप्राकृतिक मौत तो नहीं हो रही। शहर में इन दिनों लोगों ने भी चिकन खाना कम कर दिया है। इससे साफ है कि शिमला शहर में भी बर्ड फ्लू का असर दिखा है। इसके अलावा जो लोग खा भी रहें हैं, वह भी सोच विचार कर चिकन की खरीददारी कर रहें है। नगर निगम के वेटरनरी पब्लिक हेल्थ ऑफिसर डा. नीरज मोहन ने कहा कि शहर में मीट की डिमांड घटी है। उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से पके हुए मीट को खाने में कोई दिक्कत नहीं है। इससे किसी तरह की बीमारी का खतरा नहीं है। हां, कच्चे या अधपके मीट के सेवन से बचना चाहिए। यदि हम पूरी तरह से पका हुआ मीट खाते हैं, तो कोई खतरा नहीं है।


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