मजदूर ने बचाई थी लड़की की इज्जत, 7 साल बाद ऐसे चुकाया अहसान, जानकर सलाम करेंगे आप

आज का जमाना काफी बदल गया है, इस समय सोशल मीडिया पर आए दिन कई सारी खबरें सामने आती रहती हैं। चाहे ये खबरें छोटी हो या फिर बड़ी हो हर तरह की खबरें पल भर में आपके सामने होती है। वहीं आपको ये भी बता दें की इनमें से कुछ खबरें ऐसी भी होती हैं जिस पर विश्वास पर कोई यकीन नहीं कर सकता है। आज भी एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर हर कोई हैरान हो जाएगा जी हां इस कहानी को सुनने के बाद आपको ये विश्वास हो जाएगा की वाक़ई में आज भी भगवान इस धरती पर हैं। दरअसल ये कहानी एक मजदूर की है जिसका नाम शिवदास राना था। शिवदास विभूतीपुरा जिला कोलार, कर्नाटक का रहने वाला था।

शिवदास के परिवार में उसकी पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे थे। और हमेशा की तरह एक दिन सुबह 6 बजे मजदूरी के लिए घर से निकला जाता है लेकिन उस दिन कुछ ऐसा होता है जिसे वो भूला नहीं सकता था। जी हां हमेशा की तरह जब वो काम करके घर शाम को लौटता होता है तो काफी अन्धेरा हो जाता है। अक्सर वो घर आते समय अपने तीन साथियों के साथ आता जाता था लेकिन उस दिन काफी काम था जिसकी वजह से उसे देर हो रहा था और घर लौटने में 9 बज गया था। तभी उसने अपनी साइकिल उठाई और गाँव के लिए चल दिया जैसे ही वो कोलार से 5 किलोमीटर आगे बढ़ता है तो उसे रास्ते में रोड के किनारे खेतों से काफी आवाजें सुनाई देती है वो वहीं रूक जाता है।

उसने गौर से सुना तो उसे महसूस हुआ की वो किसी लड़की की आवाज है बिना कुछ सेाचे तुरंत खेतों की तरफ भागते हुए गया तब उसने देखा की एक मासूम सी लड़की के साथ तीन लड़के जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे थे। फिर उसने अकेले ही उस लडकी को बचाने के लिए उन लड़कों से भीड़ गया उन तीनों लड़को ने लड़की को छोड़ शिवदास को पीटना शुरू कर दिया। फिर भी शिवदास ने हार नहीं मानी वो लड़ते रहा और लड़कों ने शिवदास को मार -मार कर पश्त कर दिया इसके बाद भी शिवदास हिम्मत नहीं हार रहा था तब जाकर उन लड़कों को वहां भागना पड़ा शिवदास बेहद ही ज्यादा जख्मी हो गया था किन्तु उसकी हिम्मत नहीं टूटी।

उसने उस लड़की को अपनी साइकिल पर बैठाया और कोलार में उसके घर ले जाकर केईबी कालोनी में छोड़ दिया, लेकिन वो इतना ज्यादा जख्मी था की वो घर में ही गिर गया। जब उस लड़की के परिवार वालों ने यह सब देखा तो वह हैरान रह गये। जिसके बाद वो उसे अस्पताल में भर्ती कराने ले गए। बता दें की उस लड़की के पिता सेना में एक अधिकारी थे। उस दिन वह अपने एक दोस्त के साथ घूमने गई थी और उसी समय उन तीन लड़कों ने उसे दबोच लिया। जिसके बाद उसके दोस्त उसे छोड़कर भाग गए लेकिन शिवदास ने उसकी मदद की।

अब इस घटना को सात साल बित चुके थें और शिवदास हमेशा की तरह अपने काम पर लग गया था और रोज की तरह वो मजदूरी करने शहर गया हुआ था और वो लड़की और उसके पिता अविनाश गुप्ता उसके घर पर पहुँच गए। लेकिन शाम को शिवदास जब घर आया तो उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वो पुलिस वालों को देखकर घबरा गया था। इतने में ही उस लड़की ने शिवदास के आते ही उसके पैर छुए और उसे सात साल पुरानी घटना याद दिलाई।

शिवदास उस घटना को एक सपना समझ कर भूल गया था, लेकिन वो लड़की उसे कैसे भूल सकती थी, जिसमें उसे नया जीवन मिला था। अब उस लड़की के पिता ने शिवदास को कोलार में एक घर खरीद कर दिया और एक ऑटो रिक्शा। आज शिवदास मजदूरी नहीं करता है, ऑटो रिक्शा चलाता है।


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