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किसान फसल अवशेष न जलाएं, बल्कि उसका प्रबंधन करें : एसडीएम भारती

किसान फसल अवशेष न जलाएं, बल्कि उसका प्रबंधन करें : एसडीएम भारती

एडीएम डाॅ. पूजा भारती ने अपने कार्यालय में फसल अवशेष प्रबंधन एवं धान के फाने न जलाने के बारे में संबंधित अधिकारियों की मीटिंग ली। एडीएम ने मीटिंग में अधिकारियों को फसल अवशेष न जलाने बारे आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने ने बताया कि प्रदेश सरकार ने किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील की है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कस्टम हायरिंग सैंटर भी खोले गए हंै। फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा समय-2 पर किसानों के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जाता है और इन कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि कृषि यंत्रों का प्रयोग करके किसान अपने खेत से अधिक पैदावार ले सकता है। उन्होंने कहा कि इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी व पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से बचाव भी होगा। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है और भूमि में मौजूद सूक्ष्म लाभकारी जीव व मित्र कीटों का नुकसान होता है।

उन्होंने मीटिंग में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे संबंधित पटवारी एवं ग्राम सचिव को आदेश दें कि वे किसानों को गांव स्तर पर फसल अवशेष प्रबंधन एवं फसल अवशेषों को न जलाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने मार्किट कमेटी के सचिव को निर्देश दिए कि वे मंडियों में आए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन एवं फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक करें।

उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि किसान इन कृषि यन्त्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान फसल अवशेषों को जलाएगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से हमारा पर्यावरण दूषित होता और पर्यावरण दूषित होने से हमें व हमारी आने वाली पीढ़ियों को अनेक भयंकर बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमें पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए फसल अवशेषों को जलाने की अपेक्षा फसल अवशेष प्रबंधक करना चाहिए।

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