मोती की खेती करने वाले किसान विनोद कुमार ने यू ट्यूब से ली ट्रेनिंग, अब कमा रहे लाखों रुपये


कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन ने कइयों की जिंदगी को प्रभावित किया लेकिन गुरुग्राम के जमालपुर के रहने वाले विनोद कुमार ने इसे अवसर की तरह लिया। मोती की खेती करने वाले किसान विनोद कुमार ने लॉकडाउन के तीन महीने में न सिर्फ मिलिट्री मशरूम की खेती सीखी बल्कि मिलिट्री मशरूम के लिए लैब भी स्थापित किया। अब वे इसकी खेती के माध्यम से लाखों रुपये कमा रहे हैं और गांव के दूसरे लोगों को भी ट्रेनिंग दे रहे हैं। विनोद कुमार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बात से काफी प्रभावित हुए हैं, उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ मोती की खेती और मिलिट्री मशरूम की खेती भी शुरू कर दी है।

गांव जमालपुर में मोती की खेती करने वाले किसान विनोद कुमार बताते हैं कि मोती की खेती करने के लिए आवश्यक सीप की सप्लाई लॉकडाउन के दौरान बिलकुल ठप हो गई थी। इस खेती के लिए अब भी सीप की सप्लाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में मिलिटरी मशरूम की खेती ने उस नुकसान की भरपाई कर दी है। वे बताते हैं कि मिलटरी मशरूम की खेती में महज 60 हजार की लागत से ही किसान साल में चार लाख रुपये तक भी कमा सकते हैं। मशरूम उगाने के लिए ज्यादा जगह की भी जरूरत नहीं होती। इस खेती को एक कमरे और एक एसी के साथ भी शुरू किया जा सकता है। वे बताते हैं कि उन्होंने एक कमरे से इस खेती की शुरुआत की है। एक एसी और कुछ सस्ते उपकरण से अब लाखों की आमदनी कर रहे हैं।

1-2 लाख रुपये प्रति किलो तक बिकता है मिलिट्री मशरूम
विनोद कुमार बताते हैं कि मिलिट्री मशरूम की क्वालिटी के हिसाब से इसकी कीमत तय होती है। अच्छी क्वालिटी की मिलिट्री मशरूम 2-3 लाख रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती है। वे बताते हैं कि वे इसे 60 हजार से एक लाख रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं। इस मशरूम की खासियत बताते हुए कहते हैं कि यह औषधीय रूप से काफी उपयोगी है। इस मशरूम का उपयोग एलर्जी, अस्थमा, कैंसर, डायबिटीज जैसी लाइफ स्टाइल बीमारियों की दवाइयां बनाने में किया जाता है। इस मशरूम के सेवन से स्टैमिना और इम्युनिट भी अच्छी रहती है। इसलिए भी इस मशरूम की कीमत और मांग बढ़ गई है। यह मशरूम जिम जाने वाले युवाओं में काफी लोकप्रिय है क्योंकि इससे स्टैमिना भी बढ़ता है और इसके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं है।

मार्केटिंग के बाद शुरू करें खेती
विनोद कुमार बताते हैं कि मशरूम की खेती करने से पहले उन्होंने उत्पाद को बेचने का काम शुरू कर दिया था। गांव के जिम, अखाड़े, अस्पताल के लोगों से बात की और इस मशरूम के लाभ बताए। उसके बाद मांग के हिसाब से खेती की शुरुआत की। सबसे खास बात यह है कि इस मशरूम को सुखा कर तीन से चार साल तक भी रखा जा सकता है। इसलिए भी इस खेती में नुकसान की संभावना कम है। मिलिट्री मशरूम की खेती काफी लाभप्रद है। इससे किसानों की आय दो गुनी से तीन गुनी हो सकती है।
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