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मुंबई के मकान मालिक ने लिखा- मुस्लिम और कुत्ते अलाउड नहीं हैं, पत्रकार राणा अय्यूब ने शिकायत की



1947 से पहले की बात है. 200 साल से भी ज्यादा वक्त तक अंग्रेज़ों का गुलाम रहा देश. तब ट्रेनों के फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट में, होटलों में भारतीयों का जाना अलाउड नहीं था. साफ शब्दों में लिखा होता था- Dogs and Indians not allowed. माने कुत्तों और भारतीयों का प्रवेश निषेध ।

होटलों, दुकानों के आगे इसी तरह के नोटिस 19वीं सदी में कई जगह लगे मिलते थे. उनमें लिखा होता था- Blacks and Dogs not allowed. अश्वेतों और कुत्तों का अंदर आना मना है ।


लेकिन हम अभी ये क्यों बता रहे हैं?
क्योंकि एक फेसबुक पोस्ट वायरल है. इसमें बताया गया है कि किराए के लिए एक घर उपलब्ध है. मुंबई के खार इलाके में ये घर एक लाख 40 हज़ार रुपये में अवेलेबल है. तस्वीरों में बड़ा सुंदर भी लग रहा है. इसमें पार्किंग फैसिलिटी भी है. बस एक दिक्कत है. कैसी दिक्कत?

इस ऐड में लिखा है कि ये घर मुस्लिमों और पेट्स यानी पालतू जानवरों के लिए अवेलेबल नहीं है. इस ऐड का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए पत्रकार राणा अयूब ने लिखा-


“मुस्लिम और पालतू जानवर अलाउड नहीं हैं. ये मुंबई के सबसे पॉश इलाकों में से एक है, बांद्रा. ये 20वीं सदी का भारत है. कोई मुझे बताए कि हम साम्प्रदायिक देश नहीं हैं, कह दो कि ये रंगभेद नहीं है.”

एक और ट्वीट में राणा ने लिखा कि उनकी हाउसिंग सोसायटी ने नफरतभरे ट्वीट करने वाले सिक्योरिटी गार्ड को काम से निकाल दिया. लेकिन महाराष्ट्र में इस तरह की नफरत कैसे बर्दाश्त की जा रही है? राणा ने अपने ट्वीट में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख, मलाड वेस्ट से विधायक असलम शेख और नवी मुंबई पुलिस को भी टैग किया है ।


राणा के इस ट्वीट से कई लोग सहमत नज़र आए. वैष्णा रॉय नाम की एक यूज़र ने लिखा कि वो चेन्नई में घर ढूंढ रही हैं. उनसे सबसे ज्यादा जो सवाल पूछा जाता है, वो ये है कि वो मुस्लिम तो नहीं हैं. उन्होंने लिखा –

‘अगर मैं मुस्लिम होती, तो कई घर मेरे लिए अवेलेबल नहीं होते. ब्रोकर कहते हैं- सॉरी मैडम, मकान मालिक कहते हैं, इसलिए पूछना पड़ता है.’


वहीं कई लोग कुछ और पोस्ट्स निकाल लाए, जिनमें केवल मुस्लिमों के लिए घर उपलब्ध होने की बात लिखी गई थी ।



(दा लल्लनटॉप से साभार)
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