हिमाचल के निजी संस्थान सरकार के लिए बेगाने क्यों?, बाहरी संस्थानों पर लाखों खर्च रही सरकार - Himachalse

Shimla/HimachalSe: हिमाचल के निजी संस्थान सरकार के लिए बेगाने क्यों?, बाहरी संस्थानों पर लाखों खर्च रही सरकार :-

 

हिमाचल सरकार कोरोना काल में दावे कर रही है कि राज्य के लोगों को रोजगार के अवसर व उनके उद्योगों को चलाने के लिए आर्थिक मदद करेगी। हैरानी है कि ये सभी दावे धरातल पर सही साबित नहीं हो पा रहे हैं। एक ताजा मामला कांगड़ा जिला से सामने आया है, जिसमें बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत हिमाचल की 26 बेटियों का सिलेक्शन जिला प्रशासन की ओर से किया गया है। इस योजना के तहत बाहरी राज्य के निजी शिक्षण संस्थान को सरकार 20 लाख रुपए की फीस दो साल के लिए अदा करेगी। हालांकि इस संक्रमण के दौर पर छात्राओं को अपने घर छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा।

इन बेटियों की वेब क्लासिज लगाई जाएंगी, वहीं जेईई मेन-नीट के एग्जाम की तैयारियां आराम से कर पाएंगी। बताया जा रहा है कि जेईई, नीट की ट्रेनिंग के दौरान हर हफ्ते टेस्ट भी होंगे। फिलहाल हिमाचल की बेटियों को आगे बढ़ने के लिए सरकार ने इस योजना के तहत एक अवसर तो प्रदान किया है, लेकिन सवाल वही है कि आखिर प्रदेश सरकार को अपने ही राज्य के निजी संस्थानों पर भरोसा क्यों नहीं है। कांगड़ा के अलावा दूसरे जिलों में भी इस तरह के मामले हैं, जहां पर बाहरी राज्यों के शिक्षण संस्थानों पर सरकार लाखों रुपए खर्च करती है। इसी तरह शिक्षा विभाग में भी शिक्षा से जुड़ी कई ऐसी योजनाएं है, जो सीधे छात्रों से जुड़ी हुई हैं। वहीं लाखों रुपए की स्कॉलरशिप छात्रों को दी जाती है। इस योजना में मेधा प्रोत्साहन योजना भी शामिल है। इस योजना के तहत भी हर साल हिमाचल व राज्य से बाहर के शिक्षण संस्थानों से आवेदन मांगे जाते हैं। हर साल कई शिक्षण संस्थान बाहरी राज्यों के चुने जाते हैं और लाखों रूपए का बजट निजी शिक्षण संस्थानों के खाते में जाता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर आर्थिक संकट में भी क्यों हिमाचल सरकार राज्य के प्राइवेट शिक्षण संस्थानों के बारे में नहीं सोच रही है। हिमाचल के कई निजी शिक्षण संस्थान बंद होने की कगार पर हैं, इसके साथ ही कई युवा बेरोजगार भी हो गए हैं। हिमाचल में पहले से ही लाखों लोग बेरोजगार हैं।

ऐसे में अब आर्थिक संकट की वजह से फिर से इतने लोग बेरोजगार हो गए हैं। बहुत से युवा उद्यमी, युवा शिक्षाविद सामने आए हैं और स्टार्टअप के रूप में राष्ट्र स्तरीय कोचिंग इंस्टीच्यूट शुरू किए हैं, पर वे कोविड लॉकडाउन ने उन्हें तबाह कर दिया है। सरकार ऐसे संस्थानों को कुछ राहत ऐसी योजनाओं से दे सकती थी,पर…। बता दें कि सरकार ने स्टार्टअप ओर स्वावलंबन योजना भी इस मकसद से ही शुरू की है कि हिमाचल के लोगों को उद्योग के क्षेत्र में सहारा मिल सके । वहीं, उनके बिजनेस को सहायता प्रदान की जा सके। लेकिन अगर इस तरह की सरकारी योजना में निजी शिक्षण संस्थानों को सरकार का सहारा मिल जाए, तो कोरोना के इस संकट में उनकी डूबती हुई नैया को सहारा मिल जाएगा। जानकारी के अनुसार सालों से सरकार को हिमाचल के निजी शिक्षण संस्थानों पर भरोसा नहीं है, यही वजह है कि बेहतर शिक्षा प्रदान करने के दावे कर छात्रों को बाहरी राज्यों के शिक्षण संस्थानों में लाखों रुपए की कोचिंग के लिए भेजा जाता है।

राज्य में हैं कई बड़े शिक्षण संस्थान

हिमाचल प्रदेश में कई ऐसे बड़े निजी शिक्षण संस्थान है, जहां पर नीट, जेईई व कई अन्य बड़े-बड़े कोर्सिस की ट्रेनिंग करवाई जाती है। कांगड़ा, शिमला, हमीरपुर, बिलासपुर और सोलन में ऐसे सबसे ज्यादा निजी शिक्षण संस्थान हैं।

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