अंतरराष्ट्रीय ल्यूज खिलाड़ी शिवा केशवन का छलका दर्द; जो मेरे साथ हुआ, किसी और खिलाड़ी के साथ नहीं होने दूंगा - Himachalse

Shimla/HimachalSe: अंतरराष्ट्रीय ल्यूज खिलाड़ी शिवा केशवन का छलका दर्द; जो मेरे साथ हुआ, किसी और खिलाड़ी के साथ नहीं होने दूंगा :-

 

हिमाचल सरकार की अनदेखी से हताश व निराश हुए मनाली निवासी भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय ल्यूज खिलाड़ी शिवा केशवन ने कहा कि खेल के इस क्षेत्र में जो मैंने झेला है, उसे किसी और खिलाड़ी को नहीं झेलने दूंगा। हिमाचल सरकार की अनदेखी का दर्द उनके चेहरे पर साफ झलका। शिवा केशवन रविवार को हिमाचल प्रदेश विंटर गेम्स एसोसिएशन के समारोह में सम्मान ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके पिता केरल से व माता इटली से हैं। शायद इस कारण प्रदेश सरकार ने मेरी प्रतिभा को जानना उचित नहीं समझा, लेकिन मेरा तो जन्म भी मनाली में हुआ और मेरी कर्म भूमि भी यही है।

बावजूद इसके प्रदेश में शरद खेलों को बढ़ावा देने को सरकार की यथासंभव मदद करूंगा और युवाओं को शरद खेलों के प्रति प्रेरित करूंगा। 1998 में पहली बार ओलंपिक में हिस्सा लेकर इतिहास रचा। ल्यूज खेल के बारे में  ऑस्ट्रिया के जाने माने खिलाड़ी गुंटर लेमरर ने 1997 में रू-ब-रू करवाया। बिना उपकरणों के यह खेल शुरू करना दिक्कत भरा था, लेकिन जुनून सब कमियों में भारी पड़ गया। शुरू में खेल के उपकरण दक्षिण कोरिया की टीम से उधार लिए। शिवा ने कहा कि साल 1998 में 16 साल की उम्र में पहली बार विंटर ओलंपिक में ल्यूज खेल में भाग लेकर सबसे कम युवा ओलंपियन बना।

पहले मुझे हल्के में लिया गया

शिवा ने बताया कि पहली बार जब दक्षिण कोरिया खेलने गया, तो दुनिया के खिलाडि़यों ने मुझे बहुत हल्के में लिया। भारत में चर्चा होती थी कि कैसे क्वालिफाई करेगा। क्वालिफाई कर दिया, तो सुनने को मिलता था, कैसे पदक हासिल करेगा। पदक हासिल कर दिया, तो बोलते थे रिकॉर्ड कैसे बनाएगा। जब एशियन रिकॉर्ड बना दिया, तब दुनिया ने मेरी प्रतिभा का लोहा माना। सबकी सुनी, लेकिन मन की बात को प्राथमिकता दी। देश ने देर सवेर मेरी प्रतिभा का सम्मान कर ल्यूज खेल को भी मान दिया है। प्लेटफॉर्म व सहयोग न मिलने से जिन परिस्थितियों से मुझे जूझना पड़ा है। मेरा प्रयास रहेगा कि आने वाले खिलाडि़यों को अच्छा प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवा सकूं। शिवा ने कहा कि विंटर ओलंपिक गेम्स के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए नेशनल टैलेंट स्काउट नाम से कार्यक्रम भी चलाया है।


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