भाजपा महिला मोर्चा ने दी प्रियंका गांधी का मकान को तोड़ने की धमकी



कांग्रेस ने भाजपा महिला मोर्चा के उस बयान की आलोचना की है,जिसमें उन्होंने शिमला स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बाड्रा के घर को तोड़ने की धमकी दी है। अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि भाजपा महिला मोर्चा का यह ब्यान पूरी तरह प्रदेश की कानून व्यवस्था को एक खुली चुनौती है।

राठौर ने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा की यह धमकी सहन नही की जा सकती। उन्होंने महिला मोर्चा से पूछा है कि वह बताए की उन्होंने किस आधार पर प्रियंका गांधी के घर को तोड़ने की बात कही है। उन्होंने पूछा कि क्या प्रदेश में जंगल राज चल रहा है,कि जिसमें किसी के घर को जब चाहे जो मर्जी तोड़ने की धमकियां देने लगें।

उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी का घर न तो अवैध बना है और न ही किसी सरकारी भूमि पर बना है। प्रियंका गांधी ने अपना घर प्रदेश सरकार की अनुमति से पूरे कायदे कानून व नियमों के तहत बनाया है। उनके घर को अबैध बताने वाली महिला मोर्चा पहले अपनी भाजपा सरकार से इसकी पूरी जानकारी जुटा ले। दूसरी ओर प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को कम से कम 6 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य सरकार से यह मांग उठाई है।

अखिल भारतीय कांग्रेस के गुरूवार को स्पीक ऑफ जॉब कार्यक्रम के तहत बोलते हुए प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा कि देश मे कोविड 19 के चलते प्रदेश में बेरोजगारी एक बहुत बड़ा विकराल रूप ले चुकी है। उद्योग बंद होने से लाखों युवा बेरोजगार हो चुके है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इन युवाओं के लिये रोजगार की कोई स्पष्ट नीति बनाने की बहुत ही आवश्यकता है। कोविड के इस दौर में सरकार ने न तो उद्योगों को फिर से चालू करने के ही कोई ठोस प्रयास किये है और न ही इनको कोई राहत दी है। ऐसे में इन उद्योगों में कार्यरत लाखों श्रमिक आज बेरोजगार हो गए है व इनके परिवार के सामने आज अपनी रोजी रोटी की एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि केंद्र व प्रदेश सरकार को अखिल भारतीय कांग्रेस के नेता पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के उस सुझाव पर जल्द गोर करने की सलाह दी है जिसमें उन्होंने देश मे लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि देश मे पिछले 6 सालों में जो आर्थिक मंदी छाई है उसके लिए भाजपा की नीतियां पूरी तरह दोषी है। नोटबन्दी व जीएसटी ने देश की अर्थव्यवस्था को तहस नहस कर दिया है। देश की गिरती जीडीपी से साफ है कि देश गंभीर विकट स्थिति में है और सरकार इससे उभरने में पूरी तरह विफल हो रही है।

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