घुमारवीं में मां गंगा की तर्ज पर बनेगा घाट; चार फुट पानी में डूबा रहेगा घाट













लाखों लोगों की प्यास बुझाने वाली सीर खड्ड पर मां गंगा नदी की तर्ज पर घाट का निर्माण किया जाएगा। सीर खड्ड को मां का दर्जा दिया जाएगा तथा इसकी आरती व पूजन प्रतिदिन किया जाएगा। इससे सीर खड्ड का किनारा सुबह-सवेरे कलकल बहती नीर की धारा के साथ-साथ शंख व घंटियों की आवाज से गूंजयमान होगा। बिलासपुर जिला के घुमारवीं में सीर खड्ड पर बनने वाला घाट चार फुट पानी से डूबा रहेगा। इसके लिए सीर खड्ड से छह इंच की पाइप डालकर पानी भरा जाएगा तथा कूहल से पानी को खड्ड में छोड़ा जाएगा।

मां गंगा नदी की तर्ज पर बनने वाले इस घाट को आकर्षक व सुंदर बनाया जाएगा। सीर खड्ड के किनारे एक पार्क डिवेलप किया जाएगा। वहीं यहां बनने वाले मंदिरों के रखरखाव व घाट पर होने वाली प्रतिदिन आरती के लिए बाकायदा पंडित रखकर उसे यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। घुमारवीं में सीर खड्ड के किनारे बनने वाले इस घाट के प्रारंभिक चरण का काम शुरू हो गया है। मां गंगा की तर्ज पर बनने वाले इस घाट के निर्माण का बीड़ा नेहा मानव सेवा सोसायटी ने लोगों व नगर परिषद के सहयोग से उठाया है। सीर खड्ड पर बनने वाला यह घाट घुमारवीं के मुक्ति धाम एवं मेला परिसर के समीप होगा। इसके लिए सीर खड्ड के किनारे के्रटवायर लगाए जाएंगे। ब्यूंस के पौधे लगाए जाएंगे। सीर खड्ड के किनारे लोगों को घूमने के लिए ट्रैक का निर्माण किया जाएगा।


जानकारी के मुताबिक घुमारवीं से होकर बहने वाली सीर खड्ड पर दर्जनों उठाऊ पेयजल व सिंचाई योजनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे लाखों लोगों के गले पानी से तर होते हैं। घुमारवीं के लोगों के लिए सीर खड्ड जीवन रेखा से कम नहीं है। वहीं नेहा मानव सेवा सोसायटी के संस्थापक व सचिव पवन बरूर ने खबर की पुष्टि की है।

आकर्षक पार्क-टै्रक की मिलेगी सुविधा

मां गंगा नदी की तर्ज पर बनने वाले सीर खड्ड घाट के समीप आकर्षक पार्क का निर्माण किया जाएगा, जिसमें बच्चों को खेलने के लिए झूले, बड़े-बुजुर्गों को बैठने के लिए बैंच तथा युवाओं को जिम का सामान भी रखा जाएगा। सीर खड्ड के किनारे लोगों को घूमने के लिए ट्रैक का निर्माण भी होगा। जिसमें लोग सुबह व शाम आराम से सैर कर सकेंगे।

बनेगा महाकाल; महाकाली, धर्मराज मंदिर

सीर खड्ड पर बनने वाले इस घाट के समीप मुक्तिधाम में भगवान महाकाल, भगवती महाकाली व धर्मराज के भव्य मंदिर बनाए जाएंगे, जिसमें भगवान महाकाल की मूर्ति मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्थापित की जाएगी। इन मंदिरों के आसपास फूलों की क्यारियां लगाई जाएंगी। रात के समय यह सारा इलाका दूधिया रोशनी से नहाएगा।

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