क्रोध आता है, बीपी बढ़ा है तो अपने चंद्रमा को जानिए

क्रोध आता है, बीपी बढ़ा है तो अपने चंद्रमा को जानिए

चंद्रमा मन का कारक है। चंद्रमा चतुर्थ भाव का भी कारक है। यह माता का सुख,भवन और आवास का सुख, वाहन का सुख और अन्य सुख-सुविधाएं देने वाला होता है। चंद्रमा रोहिणी हस्त और श्रवण नक्षत्र का स्वामी है। यदि किसी की जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव में अथवा चतुर्थ भाव का कारक चंद्रमा अपनी उच्च स्थिति में हो या बली हो तो वह जातक अपने जीवन में सभी सुख-सुविधाओं को प्राप्त करता है। 

चंद्रमा मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्रों में शुभ होता है और बलवान होता है। चंद्रमा के मित्र ग्रह सूर्य और बुध हैं। मंगल, गुरु, शुक्र और शनि सम ग्रह हैं। राहु और केतु चंद्रमा के शत्रु ग्रह हैं। चंद्रमा की दिशा वायव्य है। चंद्रमा वैश्य वर्ण के अंतर्गत आते हैं। सत्वगुणी हैं। मुख्य रस नमकीन है। पूर्ण चंद्रमा सौम्य ग्रह की श्रेणी में आता है जबकि क्षीण चंद्रमा पाप ग्रह की श्रेणी में आता है।

कृष्ण पक्ष की एकादशी से शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि तक चंद्रमा क्षीण होते हैं। चंद्र वृष राशि में 3 से 27 अंश तक मूल त्रिकोण में होता है। चंद्रमा स्त्री ग्रह है। चंद्रमा के देवता मां गौरी है। काल पुरुष के अनुसार चंद्रमा मन का कारक है और गले और हृदय पर आधिपत्य रखता है। यदि गोचर में चंद्रमा उच्च राशि, मूल त्रिकोण वृषभ राशि में हो तो उस समय गले और हृदय संबंधी ऑपरेशन से बचना चाहिए। 

चंद्रमा अपने भाव से सप्तम भाव पर अपनी पूर्ण दृष्टि रखता है। चंद्रमा की अपनी राशि कर्क होती है। उच्च राशि वृषभ है और नीच राशि वृश्चिक होती है। यह तीव्र गति का ग्रह है। एक राशि को पार करने में सवा 2 दिन लगते हैं। खगोल शास्त्र के अनुसार पृथ्वी के सबसे निकट होने कारण मानव प्रवृत्तियों पर इसका बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। जिन व्यक्तियों का चंद्रमा नीच का है या कम अंशों का है तो पूर्ण चंद्रमा के कारण अर्थात पूर्णिमा के आसपास ऐसे लोगों को अधिक क्रोध आता है। बीपी बढ़ने की शिकायत रहती है। कुछ लोग अपना धैर्य खो देते हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post
loading...
loading...