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खर्राटे लेने वाले हॉस्पिटल में एडमिट कोरोना मरीजों में मौत का खतरा तीन गुना ज्यादा होता है।

खर्राटे लेने वाले हॉस्पिटल में एडमिट कोरोना मरीजों में मौत का खतरा तीन गुना ज्यादा होता है।

इन दिनों कोरोना ने सबकी नींद उड़ा कर रख दी है। लोग अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सजग रहने लगे है। यूनिवर्सिटी ऑफ वावरिक के वैज्ञानिकों ने ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया और कोरोना वायरस के 18 अध्ययनों की समीक्षा की। इस स्टडी में उन्होंने पाया कि नींद में खर्राटे लेने वाले हॉस्पिटल में एडमिट कोरोना मरीजों में मौत का खतरा तीन गुना ज्यादा होता है।

कोरोना से है मौत का ज्यादा खतरा:

शोधकर्ताओं ने पाया कि नींद में गले की मांसपेशियों के रिलैक्स होने से उसका वायुमार्ग अस्थायी रूप से बंद हो जाता है, जिस वजह से लोगों को खर्राटे आने लगते हैं। हॉस्पिटल में एडमिट ऐसे मरीजों की जान को वायरस से ज्यादा खतरा होता है।

स्टडी के मुताबिक, डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों में ये समस्या बड़ी आम है। इन सभी बीमारियों में कोविड-19 से मौत का खतरा और भी ज्यादा होता है। ब्रिटेन में करीब 15 लाख लोग ‘ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया’ के शिकार हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत लोग डायग्नोज नहीं हुए हैं।

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