गांजा कुछ इस तरह असर करता है मेंटल हेल्थ पर, नशे से हो सकता है ये नुकसान

मेंटल हेल्थ पर कुछ इस तरह असर करता है गांजा, नशे से हो सकता है ये नुकसान

गांजा (Marijuana) एक प्रकार का नशीला पदार्थ है। गांजा वास्तव में कैनबिस सैटाइवा (Cannabis sativa) नामक पौधे के सूखे फूलों, पत्तियों, तने और बीजों के हरे-भूरे रंग का मिश्रण होता है। लंबे समय तक गांजे के सेवन से व्यक्ति को इसकी आदत लग जाती है। वर्तमान समय में इसका सेवन करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जो एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें ज्यादातर युवाओ की संख्या है। युवा किसी भी देश का भविष्य माना जाता है. गांजे के लगातार सेवन से शरीर पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और यह कई बीमारियों को जन्म देता है. यह मस्तिष्क तंत्रिका के विकास और उसके कार्यों को प्रभावित करता है. इससे हमारे रोजमर्रा के कार्यों पर असर पड़ने लगता है और हम सुस्त होते जाते हैं।

लगातार गांजे के सेवन से आईक्यू (IQ) लेवल कम हो सकता है
किशोरों में गांजे का सेवन विशेष रूप से खतरनाक माना गया है क्योंकि किशोरावस्था में उनके दिमाग का विकास होना शुरू होता है और यह उनके दिमाग पर बुरा असर डालता है और दिमाग का विकास सुचारू रूप से नहीं हो पता है। किशोरावस्था से युवावस्था तक लगातार गांजे के सेवन से आईक्यू (IQ) लेवल कम हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति लम्बे समय तक इसका सेवन करता है तो वह सांस सम्बंधित रोग से ग्रसित भी हो सकता है और उसकी याददाश्त प्रभावित हो सकती है. व्यक्ति का काम, सामाजिक जीवन और परिवार के साथ रिश्ते भी इससे प्रभावित हो जाते हैं।

शारीरिक क्षमता को प्रभावित करती है 
गांजे के नियमित सेवन से लोगों में डिप्रेशन (Depression) और चिंता की भी संभावना ज्यादा रहती है। इसके सेवन से सिजोफ्रेनिया के मरीजों की हालत बिगड़ सकती है। इसके नियमित इस्तेमाल से लगातार खांसी और कफ भी बन सकता है। गांजे का सेवन करने से ब्लड में टेट्राहाइड्रोसैनाबिनोल (Tetrahydrocannabinol) की सांद्रता बढ़ जाती है जो शारीरिक क्षमता को प्रभावित करती है और अगर इस दौरान ड्राइविंग की जाय, तो व्यक्ति अपना नियंत्रण खो सकता है और दुर्घटना भी हो सकती है। गांजे के सेवन से फेफड़ों का कैंसर, गर्दन या सिर में कैंसर हो सकता है। गर्भवती महिलाओं द्वारा इसके सेवन से जन्म लेने वाले बच्चे का वजन कम हो सकता है या बच्चे का जन्म समय से पूर्व हो सकता है। समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चे को नियोनेटल इंटेंसिव देखभाल की आवश्यकता होती है।

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