प्राकृतिक स्रोतों में बढ़ाई जाएगी पेयजल उपलब्धता

प्राकृतिक स्रोतों में बढ़ाई जाएगी पेयजल उपलब्धता

हिमाचल प्रदेश फॉरेस्ट इकोसिस्टम क्लाइमेट प्रूफिंग (केएफडब्ल्यू वित्त पोषित) परियोजना के तहत 2022 तक कांगड़ा और चंबा के 150 प्राकृतिक जल स्रोतों का सुधार किया जाएगा। सुधार का मुख्य उद्देश्य इन स्रोतों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना रहेगा। इसको लेकर दोनों जिलों में सभी नौ वन मंडलों के अधिकारियों व फील्ड स्टाफ को आदेश जारी कर दिए हैं।

मुख्य परियोजना निदेशक आरएस बन्याल की अध्यक्षता में फॉरेस्ट इकोसिस्टम क्लाइमेट प्रूफिंग परियोजना के तहत दो दिवसीय ओरिएंटेशन ट्रेनिंग एंड रिव्यू कार्यशाला हुई। उन्होंने कहा कि जिलों के नौ वन मंडलों में कार्य किया जा रहा है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करना, जैव विविधता में वृद्धि और वन संसाधनों के सतत प्रबंधन के माध्यम से ग्रामीण आबादी की आय में वृद्धि करना है।परियोजना की गतिविधियां नौ क्षेत्रीय वन मंडलों में पंजीकृत ग्राम वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही हैं। परियोजना का कुल परिव्यय 304.76 करोड़ है, जिसमें से 206.02 करोड़ कर्ज, 16.40 करोड़ ग्रांट, 30.52 करोड़ हिमाचल प्रदेश वन विभाग और 11.81 करोड़ लाभार्थी की हिस्सेदारी है।

वर्ष 2020-21 के दौरान 50 करोड़ की राशि परियोजना की विभिन्न गतिविधियों के संचालन के लिए आवंटित की गई है। परियोजना के तहत मुख्य गतिविधियां लैंटाना, संक्रमित क्षेत्रों का पुनर्वास, बहुउद्देशीय स्थानीय वृक्ष प्रजातियों का रोपण, प्राकृतिक वन संवर्धन, चारागाह विकास, मृदा संरक्षण कार्य और प्रवेश चरण गतिविधियां हैं। मुख्य रूप से कांगड़ा व चंबा के 150 पेयजल के प्राकृतिक स्रोतों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। परियोजना के तहत उगाए गए वृक्षारोपण के बेहतर अस्तित्व और संरक्षण के बदले ग्राम वन प्रबंधन समितियों को प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाएगा।

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