कभी जानलेवा थीं ये बीमारियां लेकिन वैक्सीन आने के बाद खत्म हो गया डर

कभी जानलेवा थीं ये बीमारियां लेकिन वैक्सीन आने के बाद खत्म हो गया डर

दुनिया भर में कोरोना का कहर बरपाया हुआ है. कोरोना के चलते विश्व भर में 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. विशेषज्ञ लगातार कोरोना वैक्सीन खोजने में लगे हुए है. बताया जा रहा है कि कई देशों में वैक्सीन ट्रायल की शुरुआत हो चुकी है पर अभी नतीजो पर आना बाकी है. भारत में भी कोरोना वैक्सीन को लेकर कोशिशें लगातार जारी है.

पर क्या आप जानते है कि अब तक दुनिया भर में ऐसी कितनी बीमारियां है जिनके टीके निकल चुके है?

आइये जानते है वो बीमारियां जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकती है अगर वक्त रहते उसका टीका ना लगाया जाएं.

चेचक

चेचक एक गंभीर बीमारी मानी जाया करती थी. चेचक से शरीर में दाने उभरते थे. खुजली से लेकर तेज बुखार हो जाता था. शरीर में कमजोरी और बदन दर्द रहना चेचक के लक्षण होते है. ये बीमारी लगातार 17वीं दशक में तेज़ी से बड़ रही थी, जब 1798 में एडवर्ड जेन्नर ने चेचक की वैक्सीन बना कर तैयार करी.

पोलियो

सन् 1910 में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में पोलियो के रोगी मिल रहे थे. स्थिति तेज़ी से बिगड़ती जा रही थी. बच्चे समेत बड़े इसकी चपेट में आ रहे थे. जब 1952 में जोनास सॉल्क और अल्बर्ट साबिन के 1962 में बनाये टीकों के कारण इस पर नियंत्रण लगाया जा सका.

रेबीज

रेबीज वो वायरस है जो जानवरों के काटने से फैलता है. बताया जाता है कि ये एक जानलेवा वायरस है क्योकि इसके लक्ष्ण काफी समय बाद देखने को मिलते है. बुखार, सिर में दर्द जैसे इसके लक्ष्ण होता है. रेबीज की वैक्सीन फ्रांस के दो वैज्ञानिको ने सन 1885 में की थी.

डिप्थीरिया

साल 2000 में दुनिया भर में डिप्थीरिया के मरीज़ पाये गए थे. और मरीज़ों की संख्या तेज़ी से बड़ती जा रही थी. इसके लक्ष्ण में जुखाम, गले में खराश, बुखार शामिल होता था. साल 1920 में एक वैक्सीन के आने के बाद मरीज़ों की संख्या में भारी गिरावत दर्ज की गई.

खसरा

सन 1912 में अमेरिका में सबसे पहले खसरा के रोगी देखने को मिले थे. जिसके बाद इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता चला गया. साल 1963 में खसरा की वैक्सीन बन सकी और धीरे धीरे मरीज़ों की संख्या कम हो सकी.

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