ख़तरनाक है एक्टोपिक प्रेगनेंसी : समय रहते पता हो, तो हो सकता है कई समस्याओं से बचाव

ख़तरनाक है एक्टोपिक प्रेगनेंसी : समय रहते पता हो, तो हो सकता है कई समस्याओं से बचाव

जब भी कोई औरत गर्भवती होती है तो दुआओं से उसका दामन भर दिया जाता है. मां और उसके परिवार वालों को बधाई संदेश भेजे जाते हैं. वाक़ई में ये एहसास सबसे ख़ूबसूरत और नायाब है. औरत के लिए मां बनने की ख़ुशी से बढ़ कर शायद ही कोई और ख़ुशी हो. लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है जब गर्भवती होने के बाद भी औरत मां बनने से वंचित रह जाती है.

बहुत से लोगों ने गर्भपात या मिसकैरेज का नाम सुना होगा और कुछ लोगों ने इस दुख को महसूस भी किया होगा, लेकिन एक्टोपिक प्रेगनेंसी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. एक्टोपिक प्रेगनेंसी भी एक तरह का मिसकैरेज ही है या यूं कहें कि कोई अभिषाप है. अभिषाप इसलिए कि वक़्त रहते पता ना चल पाने से गर्भाशय के आस-पास के अंगों को काट कर निकालना पड़ता है और कभी-कभी इसमें औरत की जान भी चली जाती है.

एक्टोपिक प्रेगनेंसी बहुत असाधारण है. प्रत्येक प्रेगनेंसी में मात्र 2 प्रतिशत प्रेगनेंसी एक्टोपिक होती है. अगर वक़्त रहते इसके बारे में पता चल जाए तो गर्भपात के ज़रिए महिला को तमाम तरह के ख़तरों से बचाया जा सकता है.

जाने क्या और क्यों होती है एक्टोपिक प्रेगनेंसी

आमतौर पर फर्टिलाइजेशन से बच्चा पैदा होने तक औरत के शरीर में बच्चा अलग-अलग चरणों में बन कर तैयार होता है. इसके एक चरण में फर्टिलाइज्ड एग एक समान्य दूरी तय करके गर्भाशय तक जाता है और एक सम्पूर्ण बच्चे का विकास होता है. लेकिन एक्टोपिक प्रेगनेंसी में फर्टिलाइज्ड एग इतना कमज़ोर होता है कि वो बच्चेदानी तक नहीं जा पाता और बच्चेदानी के आस-पास के अंगों, जैसे फैलोपियन ट्यूब, एबडोमिनल कैविटी या सर्विक्स में पनपने लगता है.

इन अंगों में इतनी जगह नहीं होती कि वो अपने अंदर एक भ्रूण को पाल सकें. नतीज़तन ये फट जाते हैं और कुछ मामलों में मां की जान बचाने के लिए बच्चे सहित इन अंगों को काट कर निकालना पड़ता है. इस तरह एक मां बच्चे के साथ शरीर के महत्तवपूर्ण अंगों को खो देती है.

दुख की बात ये है कि ऐसे में गर्भवस्था कभी नहीं बच पाती और न ही इसे गर्भाशय में स्थानांतरित किया जा सकता है.

किसे होता है एक्टोपिक प्रेगनेंसी का ख़तरा?

एक्टोपिक प्रेगनेंसी का ख़तरा उन्हें अधिक होता है जिन्हें पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज रही हो. ये अक्सर टयूबरोक्लोसिस की वजह से होती है या फिर जिन्हें टयूबल एंडोमिट्रिओसिस हुआ हो, उनको एक्टोपिक प्रेगनेंसी का ख़तरा होता है.

जिनका पेट का ऑपरेशन हुआ हो ख़ासतौर से एपेंडिक्स निकालने का ऑपरेशन.पहले कभी एक्टोपिक गर्भावस्था होने से भी दोबारा एक्टोपिक गर्भधारण के चांसेज होते हैं. एक्टोपिक प्रेगनेंसी का एक महत्वपूर्ण कारण ध्रूमपान भी हो सकता है.

कई बार एज फैक्टर भी एक्टोपिक प्रेगनेंसी की वजह हो सकता है. 40 या 40 से ज़्यादा की उम्र होने पर एक्टोपिक प्रेगनेंसी का ख़तरा बढ़ जाता है. एक्टोपिक गर्भावस्था को पहचान पाना आसान नहीं है. इसमें महावारी के दर्द जैसा महसूस हो सकता है या फिर मरोड़ और रक्तस्राव होने पर ये महसूस होता कि आपका गर्भपात हो रहा है. लक्षण आते-जाते रहते हैं और हो सकता है कि शुरुआत में ऐसे कोई लक्षण महसूस ही न हो.

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के प्रमुख लक्षण योनि से रक्तस्राव जो सामान्य महावारी से अलग हो. रक्तस्राव हल्का और चटक या सामान्य से गहरे लाल रंग का या पानी जैसा पतला हो सकता है. कुछ महिलाओं का कहना है कि यह मुनक्का के रस जैसा दिखता है. पेट के निचले हिस्से में दर्द भी एक्टोपिक प्रेगनेंसी का एक सामान्य लक्षण है.

दर्द हल्का और बहुत तेज़ भी हो सकता है. यह दर्द लगातार बना रहता है. दर्द ऐसा महसूस हो सकता है जैसे किसी ने पेट में तेज़ छुरा घोप दिया हो. कई मामलों में इससे बेहोशी भी हो सकती है.

एक्टोपिक यानी अस्थानिक गर्भावस्था का उपचार कैसे होता है?

एक्टोपिक प्रेगनेंसी होने की आंशका होने पर कीहोल सर्जरी (लैप्रोस्कोपी) करानी पड़ती है. इसके तहत एक छोटा सा चीरा लगाकर पेट में देखने के लिए एक उपकरण डाला जाता है ताकि नालिकाओं का निरीक्षण किया जा सके.

अगर अस्थानिक गर्भावस्था का पता चले तो डॉक्टर लैप्रोस्कोप के इस्तेमाल से नलिका (फैलोपियन ट्यूब) को काटकर गर्भावस्था को निकाल सकते हैं. यदि ट्यूब फट गई हो तो कई बार कीहोल सर्जरी के बजाए पेट के जरिए ऑपरेशन की ज़रूरत होती है.

हालांकि ऐसा हमेशा नहीं होता. ऐसा गर्भावस्था और क्षतिग्रस्त नलिका को निकालने के लिए किया जाता है. यदि एक्टोपिक प्रेगनेंसी का पता शुरू में ही चल जाए तो ऑपरेशन के बजाए मेथोट्रेक्सेट दवा दी जा सकती है. यह दवा गर्भावस्था को समाप्त कर देती है. गर्भावस्था की एकदम शुरूआत में यह उपचार सबसे ज़्यादा प्रभावी है.

दोबारा अस्थानिक गर्भावस्था होने की कितनी संभावना होती है?

दोबारा अस्थानिक गर्भावस्था होने की संभावना 10 में से एक होती है. इसका मतलब है कि 10 में से 9 बार यह संभावना है कि गर्भावस्था समान्य होगी. बहरहाल, इस जोख़िम को सभी के लिए एक सामान कर के देखना मुश्किल है क्योंकि हर परिस्थिति और होने वाली क्षति की सीमा अलग-अलग होती है.

दोबारा गर्भधारण के प्रयास से पहले कितने समय का इंतज़ार करना चाहिए?

अस्थानिक गर्भावस्था से उबर पाना काफी मुश्किल हो सकता है. लेकिन ये ज़रूरी है कि शारीरिक व मानसिक तौर पर इस ग़म से उबरने की कोशिश की जाए. सामान्यत: जिन महिलाओं का लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन होता है उन्हें दोबारा गर्भधारण के प्रयास शुरू करने से पहले तीन से चार महीनों के इंतज़ार की सलाह दी जाती है.


पेट के ज़रिए हुए ऑपरेशन में ये बेहतर है कि घाव को ठीक होने के लिए 6 महीने का समय दिया जाए. अगर मेथोट्रेक्सेट दवा के ज़रिए गर्भ को खत्म किया गया है तो दोबारा गर्भधारण के प्रयास के पहले तीन महीने का इंतज़ार करना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि दवा शरीर से पूरी तरह से निकल सके.

अस्थानिक गर्भावस्था के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि एक्टोपिक प्रेगनेंसी बहुत कम होती है. नॉर्मल प्रेगनेंसी के बारे में भी महिलाओं की जागरूकता बहुत कम है, लेकिन एक विकासशील देश होने के नाते महिलाओं में प्रेगनेंसी और उससे सबंधित अनेक समस्याओं को लेकर जागरूक होना ज़रूरी है, ताकि समय रहते किसी भी समस्या का सामना किया जा सके.

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