इस गांव में नहीं होती है दुल्हन की विदाई, जानिए यहां का अनोखा रिवाज



आजकल हर गांव के अपने रीती रिवाज है। शादी करने के भी अनोखे तरीके है। सरकार ने लड़कियों के भ्रूण हत्या को रोकने के लिए कई प्रयास किये है। ऐसा भी समय था जब हिंगुलपुर गांव कन्या भ्रूण हत्या और दहेज हत्या में बहुत आगे था, लेकिन आज के समय में इस गांव ने अपने बेटियों को बचाने के लिए अनूठा तरीका अपनाया है। दशकों पहले गांव के बुजुर्गों ने लड़कियों को शादी के बाद मायके में ही रखने का फैसला किया।

नहीं होती है दुल्हन की विदाई:

हिंगुलपुर गांव की लड़कियों रिश्ते की बात में ये एक अहम शर्त होती है। गांव में रहने आ रहे दामाद को रोजगार की भी दिक्कत ना हो, इसका बंदोबस्त भी गांव के लोग मिलकर करते हैं। हिंगुलपुर गांव में आसपास के जिलों जैसे कानपुर, फतेहपुर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद और बांदा के दामाद रह रहे हैं। इस गांव की विवाहित लड़कियां अपने पतियों के साथ घर-गृहस्थी बसा लिया है।

ससुराल में ही रहता है जवांई:

मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिला मुख्यालय के पास भी ऐसा ही एक गांव है, जहां दामाद आकर रहने लगते हैं। यहां का बीतली नामक गांव जमाइयों के गांव के नाम से मशहूर है। शादी के बाद भी लड़कियों को अपने साथ रखने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि बेटी की शादी कहीं दूर करने पर दूसरे परिवार के बारे में सारी जानकारी नहीं मिल पाती है।

कई बार आधी-अधूरी जानकारी पर ही रिश्ता जोड़ दिया जाता है, जिसके वजह से दोनों ही पक्ष परेशान होते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए ई इलाकों में बेटी के साथ दामाद को घर बसाने का रिवाज चलन में है।

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