ये 5 उपाय तनाव को दूर कर देंगे

ये 5 उपाय तनाव को दूर कर देंगे

कोरोना संक्रमण की दस्तक को कई महीने बीत चुके हैं। बड़ी संख्या में लोग अभी भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ कर रहे हैं। वहीं, कइयों ने दफ्तर के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं। जबकि कुछ सार्स-कोव-2 वायरस के खिलाफ जंग में अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं। ज्यादातर लोगों ने संक्रमण के साथ भले ही जीना सीख लिया है पर नौकरी जाने, संक्रमित होने, लंबे समय तक घर में कैद रहने और सामान्य जीवन में कभी नहीं लौट पाने का ख्याल मन से बाहर निकलने का नाम ही नहीं ले रहा है। जैसा कि ब्रिटिश फिल्मकार डेविड हैमिल्टन ने अपनी किताब ‘द फाइव साइडइफेक्ट्स ऑफ काइंडनेस’ में बताया है कि दया का भाव ‘फील गुड’ करने का सबसे कारगर जरिया है, तो आइए जानते हैं ‘होम वेकेशन’ सहित किन पांच उपायों से आप खुद को तनावमुक्त रख सकते हैं।

1.छोटे-छोटे ब्रेक लेना जरूरी

‘होम वेकेशन’ के जरिये तन-मन को हर पल तरोताजा रखना खुद के प्रति दया दिखाने का सबसे आसान और कारगर जरिया है। इसलिए दोपहर में अपने पसंदीदा लंच का लुत्फ उठाने के लिए आधे घंटे का ब्रेक जरूर लें, ऑफिस डेस्क पर कभी खाना न खाएं। शाम को दफ्तर का काम समेटकर पार्क जाएं और घास पर नंगे पांव 15 से 20 मिनट टहलें, आपकी सारी थकान छूमंतर हो जाएगी। ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा मिली है तो भी ऑफिस का काम शुरू और खत्म करने का समय निर्धारित कर उसे सख्ती से अमल में लाएं।

2.रचनात्मक शक्ति को निखारें

मन को भाने वाले रचनात्मक कार्यों के लिए समय निकालना भी ‘फील गुड’ हार्मोन ‘डोपामाइन’ के स्त्राव में खासा मददगार है। दरअसल, रचनात्मकता मन में सशक्तिकरण और आजादी का भाव जगाती है, यह कुछ पल के लिए सारी चिंताएं भुला देती है। कोरोनाकाल में कोई ऐसी हॉबी चुनें, जिसे आप घर की चारदीवारी में रहते हुए पूरी कर सकते हैं, रोज उसे कुछ समय जरूर दें। मिसाल के तौर पर अगर आपको प्रकृति के साये में वक्त गुजारना या बागवानी करना पसंद है तो बालकनी में छोटा गार्डन बनाएं। यदि आपको खाना बनाना पसंद है तो रोज कुछ नए पकवान पर हाथ आजमाएं, लिखने के शौकीन हैं तो निजी अनुभव डायरी में उतारें।

3.‘न’ कहने में कोई बुराई नहीं

काम के प्रति समर्पित होना अच्छी बात है, लेकिन शारीरिक और मानसिक क्षमताओं का आकलन करना भी बेहद अहम है। तनावमुक्त रहने और उत्पादकता बनाए रखने के लिए उतना ही टार्गेट स्वीकारें, जितना आप पूरा करने की ताकत रखते हैं। जिम्मेदार पद पर विराजमान हैं तो कोई काम हाथ में लेने से पहले यह जरूर देखें कि इससे आपकी टीम पर अतिरिक्त दबाव तो नहीं पड़ेगा। टीम के लिए निर्धारित प्रोजेक्ट की प्राथमिकता तय करें, जो काम टाले जा सकते हैं, उन्हें बेवजह एक ही दिन में निपटाने का दबाव मत डालें।

4.फोन कॉल करने के बहाने ढूंढें-

कोरोनाकाल में लोग कई तरह की अप्रत्याशित घटनाओं से गुजर रहे हैं, किसी की नौकरी जा रही है तो कोई अपनों के संक्रमित होने से परेशान है। ऑफिस में आमने-सामने की मुलाकात में तो कर्मचारी एक-दूसरे से बात कर दर्द हल्का कर लेते हैं, पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ में यह सुविधा छिन गई है। इसलिए हर दो-चार दिन में सहकर्मियों को फोन मिलाने का कोई न कोई बहाना जरूर ढूंढें, इस दौरान काम के बजाय निजी जीवन से जुड़ी बातें करें। दरअसल, बॉस या सहकर्मी फोन कर मानवीय पहलुओं पर बात करें तो व्यक्ति में खुद के अहम होने का एहसास जगता है, यह स्ट्रेस हार्मोन ‘कार्टिसोल’ का स्त्राव घटाने में भी कारगर है।

5.‘सरप्राइज’ का मजा ही कुछ और है-

रोज सुबह नींद खुलते ही खुद से सवाल करें कि आप ‘अपना’ और ‘अपनों’ का दिन कैसे खुशनुमा बना सकते हैं, वो भी बिना किसी तैयारी के। जीवनसाथी को लॉन्ग ड्राइव पर ले जाएं, बच्चों के साथ अचानक पिकनिक का प्लान बनाएं, घर से कुछ पैक कराके ले जाएं और दोस्त संग खाएं। बड़े-बुजुर्गों को वीडियो कॉल कर उनका हालचाल लें, पुरानी तस्वीरों या किस्सों के जरिये यादें ताजा करें, मुश्किल दौर से गुजर रहे अपनों को प्यारभरे संदेश भेजें।

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