24 घंटे में पता चल जाता हृदय गति से की व्यक्ति डिप्रेशन में है या नहीं

24 घंटे में पता चल जाता हृदय गति से की व्यक्ति डिप्रेशन में है या नहीं

एक नई स्टडी में सामने आया है कि किसी व्यक्ति के 24 घंटे की हृदय गति (Heart Rate) में हुए बदलाव को मापने से यह पता लगाया जा सकता है कि वह व्यक्ति डिप्रेशन (अवसाद) में है नहीं. इससे डॉक्टरों को किसी व्यक्ति के अंदर अवसाद के लक्षणों का पता लग सकता है और इससे उस व्यक्ति के इलाज में मदद मिल सकती है. डॉक्टर को इस बात के संकेत मिल सकते हैं कि इलाज उस व्यक्ति पर काम कर रहा है या नहीं.

गोएथ यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. कारमेन शिवेक ने कहा कि आपकी केवल 24 घंटे की हृदय गति को माप कर हम 90 प्रतिशत सटीक जानकारी दे सकते हैं कि आप डिप्रेशन में हैं या नहीं. शोधकर्ताओं का दावा है कि शरीर के तापमान, हृदयगति और शारीरिक सक्रियता की मदद से समय रहते व्यक्ति खुद के डिप्रेशन में होने का पता लगा सकता है.

हृदय गति और डिप्रेशन के बीच की कड़ी को समझने में समस्या

अपने अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि हृदय की गति डिप्रेशन से संबंधित है. लेकिन वे अब तक यह नहीं समझ पाए हैं कि ये दोनों एक दूसरे से कैसे संबंधित हैं, क्योंकि हृदय की गति में तेजी से उतार चढ़ाव हो सकता है लेकिन डिप्रेशन एक लंबी अवधि के बाद आता है और इसके इलाज में भी महीनों लग जाते हैं. इसलिए यह देखना मुश्किल हो जाता है कि किसी के डिप्रेशन का संबंध उसकी हृदय गति से होता है या नहीं.

केटामाइन का इस्तेमाल कर किया गया अध्ययन

इस अध्ययन के लिए केटामाइन (डिप्रेशन को कम करने की दवा) का इस्तेमाल करके कई दिनों तक ह्रदय की गति को मापा गया और यह देखा गया कि मूड में बदलाव होने के साथ-साथ हृदय की गति भी बदल सकती है. केटामाइन एक एनेस्थेटिक दवा है जिसे पिछले साल दिसंबर में यूरोप में डिप्रेशन के इलाज के लिए लाइसेंस दिया गया था. यह दवा मिनटों में असर दिखाती है.

कारमेन शिवेक ने कहा कि पहले की शोधों से पता चलता है कि डिप्रेशन से ग्रस्त मरीज की हृदय गति में लगातार बदलाव होता रहता है, लेकिन दोनों के समय में एक बड़ा अंतर होने की वजह से दोनों के बीच संबंध का पता लगाने और डिप्रेशन का इलाज ढूंढने में मुश्किल होती है. लेकिन जब हमें केटामाइन के बारे में पता चला कि यह दवा मूड में तेजी से सुधार करती है तो हमें लगा कि इसका इस्तेमाल डिप्रेशन और हृदय गति के बीच की कड़ी को समझने में किया जा सकता है.

क्या होती है डिप्रेशन के मरीजों के दिल की हालत

डॉ. शिवेक ने यह काम बेल्जियम के केयू लेवेन में माइंड-बॉडी रिसर्च ग्रुप में किया, जिसमें मुख्य जांचकर्ता के रूप में डॉ. स्टीफन क्लेस शामिल थे. टीम ने 16 मरीजों के सैंपल्स की जांच की. 4 दिनों और 3 रातों तक इन मरीजों की दिल की धड़कन को मापा गया और उन पर केटामाइन इलाज का इस्तेमाल किया गया. टीम ने पाया कि डिप्रेशन से पीड़ित लोगों के हृदय की गति ज्यादा थी जो कि 10 से 15 बीट प्रति मिनट अधिक थी. यानी कि डिप्रेशन के मरीजों का दिल दिन में हर मिनट सामान्य से 10 से 15 बार अतिरिक्त धड़कता है. इन मरीजों के इलाज के बाद फिर से मापने पर उनकी हृदय गति में बदलाव देखने को मिला था. इस दौरान दिल की धड़कनों को एक पहनने लायक मिनी-ईसीजी का इस्तेमाल करके मापा गया था.

डिप्रेशन के मरीजों के इलाज में हो सकता है सहायक

शिवेक ने कहा कि आमतौर पर दिल की धड़कन दिन के दौरान ज्यादा और रात के दौरान कम होती है. ऐसा लगता है कि रात के दौरान हृदय गति में कमी डिप्रेशन का नतीजा है लेकिन यह सेहतमंद लोगों से फिर भी ज्यादा होती है. यह उन मरीजों की पहचान करने का एक तरीका है जो डिप्रेशन के नजदीक होते हैं. उन्होंने कहा कि हमारा अगला कदम इस बात का पता लगाना होगा कि डिप्रेशन के मरीजों की दिल की गति में यह जो बदलाव हम देख रहे हैं, क्या उसका इस्तेमाल डिप्रेशन से पीड़ित होते जा रहे मरीजों के लिए शुरुआती चेतावनी देने और इलाज में भी सहायक है या नहीं.

Post a Comment

Previous Post Next Post
loading...