निजी स्कूलों से टूटा मोह, 1271 विद्यार्थियों ने किया सरकारी स्कूलों में पलायन

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ऊना : जिला ऊना में कोरोना महामारी के दौरान 1271 प्राइमरी स्कूलों के विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में पलायन किया है। प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने का क्रम अभी भी जारी है। कोरोना काल में शिक्षा के जगत में काफी बदलाव हुआ है। इस महामारी के दौरान अभिभावकों ने निजी स्कूलों से मुंह फेरते हुए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाया है। इससे पहले जहां अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए लालायित रहते थे, वहीं इस वर्ष कोरोना काल में अभिभावकों का निजी स्कूलों से मोह भंग हो रहा है। अब सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में धीरे-धीरे काफी इजाफा हुआ है। यह इजाफा अभी भी जारी है। जिला ऊना में कोरोना काल के दौरान 1271 विद्यार्थियों में सबसे अधिक ऊना ब्लाक के विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों को बाय-बाय कहकर प्राइमरी सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। दूसरे नंबर पर अम्ब ब्लाक रहा है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिला ऊना के प्राइमरी स्कूलों में ऊना ब्लाक के 441 विद्यार्थियों, अम्ब ब्लाक के 218 विद्यार्थियों, हरोली ब्लाक के 196 विद्यार्थियों, गगरेट-1 ब्लाक के 143 विद्यार्थियों, गगरेट-2 ब्लाक के 115 विद्यार्थियों, जोल ब्लाक के 91 विद्यार्थियों तो बंगाणा ब्लाक के 67 विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन ली है। कोरोना काल में अब अभिभावकों को निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूल अधिक रास आ रहे हैं।

सरकारी स्कूल सुविधाओं में भी हैं आगे

जिला ऊना में प्राइमरी सरकारी स्कूल शिक्षा के साथ-साथ अन्य सुविधाएं प्रदान करने में निजी स्कूलों से कहीं आगे हैं। निजी स्कूलों में जहां हर माह हजारों रुपए फीस अदा करनी पड़ती है, वहीं प्राइमरी सरकारी स्कूलों में एक रुपए भी फीस नहीं ली जाती है। यही नहीं, सरकारी स्कूलों में किताबें व वाटर बोटल भी फ्री दी जाती हैं। इसके अलावा स्कूल वर्दी भी प्रदान की जाती है और स्टीङ्क्षचग के पैसे भी सरकार द्वारा दिए जाते हैं। पहले पकाकर विद्यार्थियों को मिड-डे मील प्रदान किया जाता था, लेकिन कोरोना काल में स्कूल बंद हैं तो उन्हें ड्राई राशन प्रदान किया जाता है। यही नहीं, राशन के कुकिंग का खर्च भी दिया जाता है।

कोरोना ने बढ़ाई अभिभावकों की मुश्किलें

कोरोना काल में पढ़ाई का नया दौर शुरू हुआ है। अब विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। ऑनलाइन पढ़ाई ने अभिभावकों के आगे अनेक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इस व्यवस्था ने अभिभावकों का खर्च बढ़ा दिया है। जिन अभिभावकों के पास स्मार्टफोन हैं, वे तो अपने बच्चों को पढ़ाई करवा रहे हैं लेकिन जिन अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, उन्हें किसी न किसी तरीके से जुगाड़ करके अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए स्मार्टफोन खरीदने पड़ रहे हैं। अभिभावक करें भी तो क्या। यदि स्मार्टफोन न लें तो विद्याॢथयों की पढ़ाई कैसे करवाएं। यदि बच्चों की पढ़ाई नहीं होगी तो बच्चों का पूरा साल बर्बाद हो जाएगा और वे पढ़ाई में भी पिछड़ते चले जाएंगे।

15 अक्तूबर तक बढ़ाई जा सकती है दाखिले की तिथि

शिक्षा उपनिदेशक (प्रारंभिक) देवेन्द्र चंदेल ने कहा कि इस बार जिला में 1271 विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी प्राइमरी स्कूलों में दाखिला लिया है। प्राइमरी स्कूलों में दाखिला लेने की तिथि 30 सितम्बर निर्धारित की गई है। विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए इसे 15 अक्तूबर तक बढ़ाया भी जा सकता है। स्कूलों में पढ़ाई की क्वालिटी पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जिला के प्राइमरी स्कूलों में विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप व वर्चुअल क्लासें ली जा रही हैं तो वहीं क्विज कंपीटीशन भी करवाए जा रहे हैं। यदि किसी विद्यार्थी के अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नहीं है तो उस विद्यार्थी को समीप के विद्यार्थी के साथ जोड़ा जा रहा है। जिला भर के स्कूलों में अध्यापक ऑनलाइन छात्रों को पढ़ाई करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में विद्यार्थियों की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्कूलों में विद्यार्थियों को बैठने के लिए डैस्क उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को फ्री किताबें, वर्दियां, वाटर बोटल व अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं।

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