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हिमाचल भवन में लापरवाही की बजह से पिट गए हिमाचली बुज़ुर्ग व महिलाएं


लॉकडाउन के कारण घर नहीं जा पा रहे लोगों को जब पता चला कि बसों के माध्यम से उनके प्रदेश की सरकार वापस ले जाने की व्यवस्था कर रही है तो वे खुश हो गए। कइयों का कहना है कि जब उन्होंने हिमाचल भवन फोन किया तो आने के लिए कह दिया गया।

सरकार ने सही से प्रचारित भी नहीं किया था कि कैसे वह कब से लोगों को लाएगी और डीडी शिमला के फेसबुक पेज से जानकारी दी जाती रही। जबकि हिमाचल के मुख्यमंत्री के फेसबुक पेज, जिसे हर हिमाचली इन दिनों देख रहा है, वहां ढंग से इसकी जानकारी नहीं दी गई।

नतीजा- बड़ी संख्या में लोग रविवार को सुबह-सुबह अंधेरे में पैदल ही चंडीगढ़ हिमाचल भवन की वे चल दिये। इनमें वे लोग थे जो इलाज कराने पीजीआई आये थे और अब किराये तक के पैसे नहीं बचे थे। जैसे-तैसे किसी रिश्तेदार के यहां रुके थे जो खुद भी परेशान थे। छात्र थे, महिलाएं थीं, बुज़ुर्ग थे।

जब वे हिमाचल भवन पहुंचे तो भारी भीड़ जमा थी। लोगों की शिकायत थी पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं थी वहां। भीड़ देखकर पुलिसकर्मियों के भी हाथ पैर फूलने लगे। हिमाचलसे.कॉम हिंदी दैनिक अमर उजाला ने खबर दी है कि पुलिस ने लाठियां चलाना शुरू कर दिया। सुबह रजिस्ट्रेशन के लिए लाइन में लगे होने के बाद जब भीड़ होने लगी तो पुलिस ने बुजुर्गों और महिलाओं पर लाठियां चलाई और भगा दिया।

पुलिस का कहना था कि बसें सिर्फ स्टूडेंट्स के लिए हैं। इस दौरान आधे लोग वापिस अपने घर चले गए। बाद में पुलिस ने बाकी बचे लोगों को लाइन में लगकर रजिस्ट्रेशन करवाने को कहा।

सरकार अभी भी हरकत में नहीं आई है। उसे चाहिए कि ढंग से प्लान बनाए और उस प्लान को सही से प्रचारित करे। लोगों को जिलों के हिसाब से लाने की योजना बनाई जा सकती है और वेब के साथ साथ फोन पर पंजीकरण करवाकर संख्या का आकलन करके बसें भेजनी चाहिए। वरना हर कोई घर आने को बेताब है और वह उम्मीद लेकर आएगा ही। जब वह निराश होगा तो छवि प्रदेश सरकार की ही खराब होगी।
Source: In Himachal

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