लॉकडाऊन ने छीना रोजगार तो सुनीता स्कूटी पर बेचने निकली पड़ी सब्जी और अचार

Una/Himachal - लॉकडाऊन ने छीना रोजगार तो सुनीता स्कूटी पर बेचने निकली पड़ी सब्जी और अचार

‘‘फलक को जिद्द है जहां बिजलियां गिराने की, हमें भी जिद्द है वहां आशियां बनाने की’’। शायर की ये पंक्तियां ऊना के गांव जलग्रां टब्बा की सुनीता देवी पर एकदम फिट बैठती हैं। 

लॉकडाऊन के बीच नौकरी से हाथ धोने वाली महिलाओं के लिए सुनीता देवी मिसाल बनकर उभरी है। दरअसल सुनीता देवी मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक उद्योग में काम करती है लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर किए लॉकडाऊन के चलते उद्योग में काम बंद है और सुनीता के पास कोई काम नहीं था। वहीं सुनीता का पति निजी बस का चालक है और लॉकडाऊन के कारण वह भी नौकरी पर नहीं जा पा रहा है और बीमार भी चल रहा है।



स्कूटी पर गांव-गांव घूम कर बेचती है सब्जी, फल और अचार


एक तो गरीबी और ऊपर से इस दंपति के पास कोई काम भी नहीं था लेकिन बावजूद इसके सुनीता ने हिम्मत दिखाई और लॉकडाऊन के बीच ही स्कूटी पर सवार होकर लोगों को घर-द्वार सब्जी, फल और आचार पहुंचाने की योजना बनाई। सुनीता आज अपनी मेहनत और हिम्मत के बल पर ही 3 बच्चों सहित परिवार का पालन-पोषण कर रही है। सुबह सूरज की किरणें निकलने से पहले ही सुनीता घर के कामकाज निपटा कर सब्जी मंडी पहुंचती है। इसके बाद गांव-गांव घूम कर सब्जी और फल बेचती है। 2 पैसे अधिक कमा ले, इसको लेकर सुनीता घर का बनाया हुआ अचार भी डिब्बे में लेकर चलती है ताकि कोई खरीददारी कर ले।



सुनीता ने बेरोजगारों को दिया संदेश

सुनीता की मानें तो लॉकडाऊन के बीच सरकार द्वारा राशन तो मिल ही रहा है लेकिन अपनी और परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने यह काम शुरू किया है। सुनीता ने बेरोजगारों को घर पर बैठे रहने की बजाय काम करने का संदेश दिया है ताकि लोग आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सकें। वहीं सुनीता की हिम्मत और मेहनत को देखकर लोग भी उसकी प्रशंसा कर रहे हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो इंसान को काम करने में कोई शर्म नहीं करनी चाहिए और मेहनत के दम पर आगे बढऩा चाहिए। अब आप हमारी ख़बरें गूगल न्यूज़ पर भी पढ़ सकते हैं।

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