Corona effect : सरकारी स्कूलों की छुट्टियों में होगी कटौती, सरकार ने दी मंजूरी

Corona effect : सरकारी स्कूलों की छुट्टियों में होगी कटौती, सरकार ने दी मंजूरी

कोरोना वायरस से बचाव को हुए लॉकडाउन से सरकारी स्कूलों की छुट्टियों पर कैंची चलना तय है। शैक्षणिक दिवस पूरे  करने के लिए बरसात, दिवाली सहित कई अन्य छुट्टियों में कटौती होगी। शीतकालीन स्कूल करीब डेढ़ माह और ग्रीष्मकालीन स्कूल एक माह तक बंद रहने के चलते आगामी छुट्टियों में कमी करने को सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। शिक्षा विभाग इस बाबत योजना बनाने में जुट गया है।

शिमला, सोलन, सिरमौर, मंडी, कुल्लू, चंबा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति सहित अन्य जिलों में स्थित शीतकालीन स्कूलों में बीस फरवरी से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ है। 16 मार्च से प्रदेश में सभी स्कूल पहले 31 मार्च, फिर 14 अप्रैल तक बंद किए गए। इसकी अवधि और बढ़ सकती है। ऐसे में शीतकालीन स्कूलों में करीब डेढ़ माह तक पढ़ाई प्रभावित हुई।

ग्रीष्मकालीन स्कूलों में अप्रैल के पहले सप्ताह से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना था, लेकिन सत्र शुरू नहीं हुआ। इसकी भी भरपाई आने वाली छुट्टियों से होगी। बरसात, दिवाली की छुट्टियां कम कर शैक्षणिक दिवस पूरे किए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कौन सी छुट्टियां कम की जानी हैं, इस पर योजना बनाई जा रही है। हालात सामान्य होते ही जब स्कूल खुलेंगे तो सरकार से मंजूरी लेकर इसका शेड्यूल जारी किया जाएगा।

स्नातक परीक्षाएं 15 मई से पहले असंभव

कोरोना के चलते एचपीयू को बंद रखे जाने से विश्वविद्यालय का पूरा शैक्षणिक शेड्यूल गड़बड़ा गया है। लॉकडाउन जारी रहने से स्नातक की सेमेस्टर और ईयर एंड परीक्षाओं के साथ ही स्नातकोत्तर परीक्षाएं एक से डेढ़ माह आगे चली जाएंगी। इससे पीजी की प्रवेश प्रक्रिया अगस्त से आगे जा सकती है। लॉकडॉउन 30 अप्रैल तक गया तो, इससे विश्वविद्यालय एक मई तक ही खुल पाएगा।

इसके बाद विवि को परीक्षाओं की तैयारी के लिए करीब 15 दिन चाहिए। इससे जाहिर है कि 16 अप्रैल से होने वाली स्नातक की परीक्षाएं 15 मई के बाद ही शुरू होंगी। इस परीक्षा में यूजी अंतिम सेमेस्टर के करीब 30 से 35 हजार विद्यार्थी बैठेंगे। 10 अप्रैल से स्नातकोत्तर डिग्री डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश को ऑनलाइन आवेदन भी शुरू नहीं हो पाया। वहीं विश्वविद्यालय की बीएड के लिए 18 मई को प्रवेश परीक्षा करवाने की योजना थी, वह भी सिरे नहीं चढ़ी।

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