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हिमाचल: मनरेगा कार्य शुरू, ग्रामसभा की मंजूरी की जरूरत नहीं, मास्क पहनना अनिवार्य

हिमाचल: मनरेगा कार्य शुरू, ग्रामसभा की मंजूरी की जरूरत नहीं, मास्क पहनना अनिवार्य

देश और प्रदेश भर में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन के बीच सोमवार को सूबे के लाखों मनरेगा कामगारों को गांवों में काम मिलना शुरू हो गया है। लॉकडाउन के कारण सरकार ने ग्राम सभा की मंजूरी की शर्त को हटा दिया है। ये काम ग्रामसभा की मंजूरी के बिना हो सकेंगे। सीमेंट न मिलने के कारण इससे होने वाले निर्माण कार्यों को फिलहाल टाल दिया गया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव डॉ. आरएन बत्ता ने इसकी पुष्टि की है।

मनरेगा कार्यों को लेकर गाइडलाइन भी जारी की गई है, जिसका मनरेगा मजदूरों को पालन करना होगा। बाकायदा पूरे कामकाज की निगरानी की जाएगी। गाइडलाइन के अनुसार दस लोगों को ही काम करने की अनुमति होगी। एक परिवार से एक ही व्यक्ति को रोजगार मिलेगा। मनरेगा कार्यस्थल पर पानी और साबुन की व्यवस्था करनी होगी। काम के दौरान मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। सामाजिक दूरी का पालन भी करना होगा। सरकार ने मनरेगा के तहत होने वाले सामूहिक कार्यों को मंजूरी नहीं दी है। कोरोना वायरस के चलते मनरेगा में एकल काम ही होंगे।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सभी 12 जिलों के ग्रामीण इलाकों में वर्तमान समय में करीब आठ लाख मनरेगा कामगार सेवाएं दे रहे हैं। लॉकडाउन के कारण प्रदेश सरकार ने मनरेगा के कामों पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी थी। इसके बाद से गांवों में मनरेगा के कामगारों की दिहाड़ी नहीं लग रही थी, जिससे इनके लिए आर्थिक संकट खड़ा हो गया था।

अभी होंगे ये काम : जल संरक्षण के तहत पानी के टैंकों का निर्माण, भूमि सुधार, पौधरोपण तथा सिंचाई से संबंधित कार्य ही किए जा सकेंगे। मनरेगा के कार्य के दौरान मास्क का प्रयोग करना जरूरी है। इसके लिए कामगार किसी भी तरह के मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं। कपड़े के बने मास्क के साथ धाठू का भी प्रयोग किया जा सकता है। कुल्लू जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी सुरजीत ठाकुर ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन का पालन कर ही मनरेगा कार्य होंगे।
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