रोजी-रोटी का सवाल: कपड़े की दुकान बंद होने पर सब्जी बेच रहे उत्तराखंड का युवक

रोजी-रोटी का सवाल: कपड़े की दुकान बंद होने पर सब्जी बेच रहे उत्तराखंड का युवक

लॉकडाऊन और कर्फ्यू लगने से रोजाना काम करने वाले लोगों को अधिक प्रभावित किया है। दूसरे प्रदेशों से रोजी-रोटी कमाने के लिए आए हजारों लोगों को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है। कर्फ्यू के कारण लोग घरों में तो रह रहे हैं लेकिन कई ऐसे लोग जो रोजाना दिहाड़ी-मजदूरी लगाकर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, उन्हें कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा गरीब लोगों और प्रवासी मजदूरों के लिए नि:शुल्क राशन दिया जा रहा है जिससे जिला में रहने वाले सभी लोगों को दो वक्त की रोटी मिल सके। ऐसे लोगों को दो वक्त की रोजी-रोटी के अलावा अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक समस्या से जूझना पड़ रहा है।

हमीरपुर के वार्ड नं. 8 में पिछले 4 सालों से रह रहे उत्तराखंड निवासी गोपाल राम कपड़े की दुकान पर नौकरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। लॉकडाऊन से पहले शिव मंदिर के पास कपड़े की दुकान करने वाले यू.पी. के लोग वापस अपने घरों को चले गए। इससे गोपाल राम ने सब्जी बेचने का निर्णय लिया। उसी दुकान के बाहर ही सब्जी मंडी से उधार कर सब्जी बेचना शुरू की, लेकिन 3 घंटे में कभी 400 रुपए कभी 500 रुपए कमा लेता है। हालांकि शहर में सब्जी की 15 दुकानें प्रतिदिन खोली जा रही हैं, जहां से लोग सब्जी खरीद रहे हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन ने सभी वार्डों में सब्जी बेचने के लिए गाडिय़ों की व्यवस्था की है। लोगों को अपने वार्ड में सब्जी मिल रही है। गोपाल राम ने बताया कि नौकरी से जो पैसे मिले, उसे सब्जी खरीदने में लगा दिया, लेकिन सब्जी बेचने से उसे कोई मुनाफा नहीं हो रहा है।

3 घंटे काम करने के बाद थोड़ी-बहुत सब्जी बचती है, उसे घर ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि कफ्र्यू लगने से बहुत से लोगों को मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं, ऐसे में मकान का किराया और रोजी-रोटी के लिए भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा उन्हें राशन मिल रहा है, जिससे वे अपने माता-पिता को रोटी खिला रहा है। गोपाल राम ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लॉकडाऊन और कफ्र्यू ही इसका उपाय है, जिसका सभी लोग समर्थन करते हैं। सब्जी की दुकान लगाने से 3 घंटे काम कर लेते हैं, इससे परिवार की जरूरतों को काफी हद तक पूरा कर पा रहा हूं। यह कर्फ्यू लोगों की भलाई के लिए लगाया गया है, लेकिन काम तो करना पड़ेगा।

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