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लॉकडाउन के बाद होंगी बोर्ड परीक्षाएं



 हिमाचल में लॉकडाउन खुलने के बाद बोर्ड की रद्द हुई परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही कॉलेज व विश्वविद्यालय में रद्द हुई परीक्षाएं भी अब लॉकडाउन खुलने के बाद शुरू की जाएंगी। शुक्रवार को सीएम जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शिक्षा मंत्री सहित शिक्षा विभाग के आलाधिकारी मौजूद हुए। शिक्षा के जुड़े अहम मुद्दों पर हुई इस बैठक में कई निर्णय लिए गए, जिसमें   हिमाचल में स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा के भूगोल विषय की परीक्षा लॉकडाउन खत्म होने के बाद करने का फैसला लिया गया। इसमें करीब चार हजार विद्यार्थी परीक्षा देंगे। वहीं, कालेजों की वार्षिक परीक्षाओं का लॉकडाउन खुलने के बाद हिमाचल विश्वविद्यालय नए सिरे से शेड्यूल तैयार करेगा।

इसी तरह सरकारी स्कूलों की छुट्टियां घटाने और शैक्षणिक दिवस बढ़ाने को लेकर तीन मई के बाद॒सरकार विचार करेगी। 12वीं की वोकेशनल और कम्प्यूटर विषय की परीक्षाओं के लिए स्कूल शिक्षा बोर्ड को सीबीएसई से चर्चा करने के बाद फैसला लेने के लिए अधिकृत किया गया है। इन वैकल्पिक विषयों की भी अभी परीक्षाएं नहीं हो पाई हैं। बैठक में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज भी मौजूद रहे। बता दें, कोरोना वायरस के चलते राज्य में लागू लॉकडाउन-कर्फ्यू की वजह से बोर्ड की ये परीक्षाएं नहीं हो पाई थीं। इसके अलावा बैठक में राज्य में कोरोना महामारी के दृष्टिगत लगाए गए कर्फ्यू के दौरान विद्यार्थियों के लिए घर पर अध्यापन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए ‘हर घर पाठशाला’ कार्यक्रम आरंभ किया गया है, ताकि विद्यार्थियों की शिक्षा जारी रहे।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिक्षा विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत अधिक से अधिक विद्यार्थियों को विभिन्न कार्यक्रमों का उपयोग कर शिक्षा प्रदान की जा रही है। दूरदर्शन शिमला पर प्रतिदिन 10वीं तथा 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तीन घंटे के कार्यक्रम के अतिरिक्त व्हाट्सऐप तथा केंद्रीकृत वेबसाइट के माध्यम से अध्यापकों द्वारा ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करवाई जा रही हैं। आकाशवाणी के माध्यम से अधिकतम विद्यार्थियों को सुविधा प्रदान करने के लिए अध्यापन मॉड्यूल आरंभ करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार कार्यक्रम के लिए श्रेष्ठ शैक्षणिक विषय वस्तु विकसित करने के लिए शिक्षा विभाग के अध्यापकों को सम्मानित करने तथा पाठशालाओं में इन कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के बारे में भी विचार कर रही है। महत्त्वपूर्ण विषयों पर विद्यार्थियों के लिए श्रेष्ठ विषयवस्तु उपलब्ध करवाने तथा पहली से 12वीं कक्षा तक कवरेज सुनिश्चित करने पर बल दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के कारण 12वीं कक्षा के जिन व्यवसायिक विषयों की परीक्षाएं आयोजित नहीं हो पाई हैं,

 विद्यार्थियों को उन विषयों में अंक प्रदान करने के लिए एक प्रभावी तथा स्वीकार्य प्रणाली विकसित की जानी चाहिए। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए एक विश्वसनीय प्रणाली विकसित हो। शिक्षा विभाग को प्रभावी एग्जिट योजना तैयार करनी चाहिए, ताकि शैक्षणिक संस्थानों की कार्यपद्धति को जितनी जल्दी हो सके सामान्य बनाया जा सके। विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए विद्यालयों तथा कालेजों के शैक्षणिक तथा खेल कैलेंडरों को दोबारा सुनियोजित किया जाना चाहिए। स्कूल शिक्षा बोर्ड को समय पर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग को वर्ष 2020-21 के बजट में उनके द्वारा घोषित की गई नई योजनाओं पर भी कार्य आरंभ करना चाहिए। उधर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश की 98 प्रतिशत प्रारंभिक पाठशालाएं तथा 90 प्रतिशत उच्च पाठशालाएं व्हाट्सऐप के माध्यम से उच्च प्राधिकारियों के साथ जुड़ी हुई हैं, जबकि 66 प्रतिशत प्रारंभिक पाठशाओं तथा 72 उच्च पाठशालाओं के विद्यार्थी व्हाट्सऐप के माध्यम से अपने अध्यापकों से जुड़े हुए हैं। सचिव शिक्षा अक्षय सूद ने मुख्यमंत्री को विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हर घर पाठशाला कायक्रम की अधिक से अधिक कवरेज सुनिश्चित बनाने के लिए विभाग द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न पहलों के बारे विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के अध्यक्ष डा. सुरेश सोनी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार, निदेशक उच्च शिक्षा डा. अमरजीत शर्मा, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा रोहित जम्वाल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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