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सिरमौर के इस सरकारी स्कूल को देखकर चकरा जाएंगे केजरीवाल

सिरमौर के इस सरकारी स्कूल को देखकर चकरा जाएंगे केजरीवाल

चंद सप्ताह पहले ही दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के बूते सत्ता में वापसी कर ली। लेकिन उपमंडल के बातामंडी में एक प्राथमिक पाठशाला ऐसी भी है, जिसे देखकर खुद केजरीवाल चकरा जाएंगे, क्योंकि इस स्कूल के कोने-कोने में बंट रहे शिक्षा के ज्ञान का सूत्रधार एक प्राथमिक शिक्षक है। अब आप यह सोच रहे होंगे कि यह स्कूल मेहनत-मजदूरी करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए कैसे वरदान बन रहा है।

दरअसल, इस स्कूल में 124 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसमें 72 प्रवासी बच्चे हैं, जिनके माता-पिता सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि जब वो हिमाचल आएंगे तो बच्चों को एक ऐसा स्कूल मिल जाएगा, जो निजी स्कूलों पर भी भारी होगा। स्कूल के हरेक कोने का इस्तेमाल ज्ञान बांटने के लिए इतनी खूबसूरती से किया है कि इसे देखने वाले चौंक उठते हैं। भवन को देखकर शायद ही कोई विश्वास करेगा कि यह सरकारी पाठशाला है। इस स्कूल के मुखिया के तौर पर बागडोर संभाल रहे मुख्य शिक्षक रामपाल के बारे में यह कहा जाता है कि इनकी तैनाती जहां भी होती है, उस स्कूल का कायाकल्प हो जाता है।

स्कूल परिसर का दौरा करने पर स्वतः ही इस बात का खुलासा हो जाता है कि खेलते-कूदते, बैठते बच्चे बेहतरीन शिक्षा हासिल करते हैं। अब अगर सरकार इस स्कूल को एक रोल मॉडल घोषित कर दे तो बात ही अलग हो जाएगी। दीगर है कि हाल ही में स्कूल ने स्वच्छता में भी प्रथम स्थान हासिल किया था। इस स्कूल में हरबल गार्डन किचन का भी नजारा अलग ही है। शौच जाने के लिए अलग से चप्पल व जूतों की व्यवस्था है। मुख्य शिक्षक रामपाल का कहना है कि स्कूल स्टाफ को पाठषाला को निखारने का श्रेय जाता है, वो तो महज जरिया बने हैं।

ये हैं खास बातें…

प्लास्टिक के कचरे को बोतलों में भरा जाता है, ताकि पॉलीब्रिक बनाई जा सकें। प्रार्थना सभा के लिए स्टेज बनाने की भी योजना चल रही है। पीने के पानी के लिए वाटर कूलर व आरओ लगे हैं। हरेक कक्षा में कूडे़दान की व्यवस्था है। इसके निष्पादन के लिए भी उचित व्यवस्था की गई है। प्रवासी बच्चे इस स्कूल के बेहतरीन नतीजे लाने में सार्थक भूमिका निभा रहे हैं।

बस ये कर दे सरकार…

स्कूल में हरेक व्यवस्था नजर आती है। लेकिन अन्य सरकारी स्कूलों की तरह यहां भी बच्चों को टाट पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। लिहाजा, सरकार या कोई दानी इस विद्यालय को डैस्क भेंट कर दे तो मामूली कमी की भरपाई भी हो जाएगी। News Source: MBM News Network
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