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रेट नहीं, वेट के हिसाब से बिकेगा बाबा का रोट


उत्तरी भारत के प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में चैत्र मेले 14 मार्च से 13 अप्रैल तक लगने वाले हैं। चैत्र मेलों के मद्देनजर रखते हुए मंदिर अधिकारी के द्वारा व्यापार मंडल, जिसमें की अप्पर एवं लोअर बाजार के अलावा सराय प्रबंधन के साथ मीटिंग की गई। इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा  बाबा बालक नाथ के दरबार में आ रहे श्रद्धालुओं से अच्छे तरीके से पेश आना रहा। बैठक में मौजूद सराय प्रबंधन को मंदिर अधिकारी के द्वारा सराय के भीतर कैमरे लगाने को कहा गया।

इसके अलावा अग्निशमन यंत्र भी सभी सराय में लगाने अनिवार्य होंगे। वहीं आईडी कार्ड पर ही कमरों की बुकिंग करने को कहा गया। उन्होंने कहा है कि सराय के भीतर जो भी लंगर लगाए जाएंगे उनका निष्पादन भी सराय प्रबंधन को भी करना पड़ेगा। वहीं मौजूद बाजार कमेटी को भी मंदिर अधिकारी द्वारा उचित दिशा-निर्देश दिए गए। सभी दुकानदारों को अपना कूड़ा डेंपर पर में डालने को कहा गया और हर दुकान के भीतर डस्टबिन रखने को भी कहा गया। इसके अलावा दुकानों के अंदर भी अग्निशमन यंत्र लगाने अनिवार्य होंगे। वहीं बाजार कमेटी को संबोधित करते हुए मंदिर अधिकारी ने कहा कि गत दिन पहले मंदिर प्रशासन के द्वारा रेट लिस्ट तैयार की गई है। उसी रेट लिस्ट के आधार पर श्रद्धालुओं को सामान बेचा जाए। उन्होंने बताया है कि रेट लिस्ट में बाजार में देसी घी का रोट 350 रुपए के हिसाब से मिलेगा। वही वनस्पति घी का रोट 150 रुपए किलो के हिसाब से मिलेगा।

मंदिर न्यास द्वारा संचालित कैंटीन  में देसी घी का रोट 300 किलो एवं वनस्पति घी का रेट 120 किलो के हिसाब से रखा गया है। हलवे की बात की जाए तो रिफाइंड वनस्पति घी का प्रति किलो 200 एवं देसी घी का प्रति किलो 300 रखा गया है। वही मंदिर न्यास की कैंटीन में वनस्पति घी का 120 एवं और देसी घी का 260 किलो के हिसाब से रेट निर्धारित किया गया है। बाजार में चाय का कप 10  के हिसाब से मिलेगा एवं कैंटीन में सात के हिसाब से मिलेगा। कैंटीन में दो पूरी एवं भटूरे चने देकर 25 रेट रखा गया है एवं बाजार के लिए 30 निर्धारित किया गया है।

वही मिठाई में बेसन लड्डू, मटर का रेट 150 रुपए किलो के हिसाब से रखा गया है। वही कैंटीन में यह रेट 130 किलो के हिसाब से रखा गया है। ढाबों के लिए रोटी की थाली का रेट 60 के हिसाब से रखा गया है व चपाती का रेट पांच रुपए प्रति पीस के हिसाब से रखा गया है। यह जानकारी मंदिर अधिकारी ओपी लखनपाल ने दी। News Source: Divya Himachal
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