केंद्र सरकार ने बंदरों को मारने की दी इजाजत, अब अधिसूचना का इंतजार


केंद्र सरकार ने बंदरों को मारने की दी इजाजत, अब अधिसूचना का इंतजार
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हिमाचल की 91 तहसीलों में बंदरों को मारने की फिर से इजाजत दे दी है। वन मंत्रालय ने बंदरों को वर्मिन घोषित करने की फाइल मंजूरी के बाद वेटिंग के लिए कानून मंत्रालय को भेज दी है। कानून मंत्रालय की हरी झंडी मिलते ही इसे लेकर केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करेगी। इसके बाद फिर से प्रदेश में बंदरों को मारने की इजाजत मिल जाएगी। केंद्र द्वारा बीते साल बंदरों को मारने की दी गई अनुमति 14 फरवरी, 2020 को पूरी हो गई है। इसके बाद से प्रदेश में बंदरों को मारने पर रोक लगी हुई है।

किसानों को 1800 करोड़ से ज्यादा का नुक्सान

बीते 3-4 सालों से केंद्र सरकार एक-एक वर्ष तक बंदरों को वर्मिन घोषित करके इन्हें मारने की लोगों को इजाजत दे रही है। इस अवधि में कुछेक किसानों ने उत्पाती बंदरों को मार गिराया है। इससे किसानों ने कुछ राहत की सांस जरूर ली है लेकिन ज्यादातर इलाकों में अभी भी धार्मिक भावना के कारण किसान इन्हें नहीं मार रहे हैं। ऐसे किसानों का बंदरों ने जीना दूभर कर रखा है। खेती बचाओ संघर्ष समिति कीएक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बंदरों समेत अन्य जंगली जानवरों के कारण किसानों को 1800 करोड़ से ज्यादा का नुक्सान उठाना पड़ रहा है। जंगली जानवरों में सबसे ज्यादा नुक्सान बंदर ही कर रहे हैं, ऐसे में बंदरों को फिर से वर्मिन घोषित करने की इजाजत के बाद किसान इन्हें मारकर अपनी फसलें बर्बाद होने से बचा सकेंगे।

वन विभाग ने जनवरी में मांगी अनुमति

राज्य सरकार ने बीते जनवरी महीने में केंद्र से नगर निगम शिमला समेत 91 तहसीलों में बंदरों को वर्मिन घोषित करने की अनुमति मांग रखी है। हालांकि फरवरी महीने में केंद्र ने वन विभाग से पूछा था कि बीते एक साल के दौरान कितने बंदर मार गिराए गए हैं। केंद्र से पूछे जाने पर वन विभाग ने जनवरी के आखिरी सप्ताह में ही केंद्र को जवाब दे दिया है। अब केंद्रीय वन मंत्रालय राज्य के वन महकमे के प्रस्ताव को स्वीकार कर चुका है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
loading...