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अफसर वजीफा देने का लेते थे कमीशन. सीबीआई के राडार पर विभाग के बड़े अधिकारी

Major officers of the department on the CBI radar
HimachalSe : प्रदेश के छात्रों की 265 करोड़ स्कॉलरशिप हड़पने के लिए शिक्षा विभाग में भी रैकेट चलता था। विभाग के अधिकारी निजी शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति जारी करने के लिए कमीशन लेते थे। हालांकि सीबीआई इस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा विभाग की दिक्कतें बढ़ गई हैं। 

ऐसे में अब आने वाले दिनों में सीबीआई गिरफ्तारियां भी कर सकती हैं। स्कॉलरशिप घोटाले में सीबीआई के राडार पर अब शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी हैं। सीबीआई अब इस घोटाले की जांच में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को भी बेनकाब कर सकती है। अब तक हुई जांच में पता चला है कि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों व निजी शिक्षण संस्थानों में छात्रवृत्ति हड़पने के लिए बाकायदा एक रैकेट चल रहा था। इसके लिए अधिकारी निजी शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति जारी करने के लिए कमीशन लेते थे। सूत्रों के मुताबिक कमीशन का यह खेल होटलों में चलता था। 

यहां पर स्कॉलरशिप जारी कराने की एवज में निजी संस्थान विभाग के अधिकारियों को कमीशन का पैसा देते थे। सीबीआई अब यह पता लगा रही है कि इस खेल में कितने लोग शामिल थे और कमीशन कितने लोगों में बंटता था। इस बात की तसदीक निजी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों से पूछताछ में भी हो चुकी है। इसके बाद ही शिक्षा विभाग के एक अधीक्षक सीबीआई के राडार पर आए। सीबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि स्कॉलरशिप की स्वीकृति से संबंधित फाइलों को शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचने नहीं दिया जाता था। 

निचले स्तर के अधिकारी व कर्मचारी फाइलों को अपने स्तर पर ही मार्क कर देते थे। जांच में यह भी पता चला है कि नियमों के विपरीत निजी ई-मेल आईडी से छात्रवृत्ति के काम को अंजाम दिया जाता था। यहां तक कि शिक्षा विभाग में छात्रों के लिए तैयार किया गया ई-पास पोर्टल से भी छेड़खानी की गई है। जानकारी के मुताबिक इस पोर्टल में प्रदेश के दो लाख 90 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। सीबीआई द्वारा शिमला में चल रही जांच में प्रदेश सरकार द्वारा पहली जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है।
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